STORYMIRROR

Adyasha Das

Others

4  

Adyasha Das

Others

तुम्हारे-मेरे बीच की दास्तान

तुम्हारे-मेरे बीच की दास्तान

1 min
285

शायद तुम्हारे मेरे बीच की दीवार 

कमजोर पड गई है

तुम उधर आह भी करो

तो इधर मेरे शरीर से रूह निकल जाती है।


बूंद बूंद मेरे आँसु का टपकना

वहां तुम्हारे दिल पे आए

बाढ़ को दिखाती है।


तुम्हारे मुस्कान से तो

आज भी रोशन है मेरा घर,

तुम्हारी नाराज़गी से

यहाँ अमावस भी पहले जैसा ही है।


फिर भी कुछ कमी

आज भी वैसी ही है तुम्हारे-मेरे रिश्ते में,

जो हमारे बीच सौ दीवार मिटाकर भी

बस एक तार जोड़ नहीं पाती है।

शायद तुम्हारे मेरे बीच का समय ही 

कभी न आने वाले कल में तबदील हो गया है।


Rate this content
Log in