सूरज की चर्चा
सूरज की चर्चा
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चलते-चलते देखा हमने
रंग बदलते मीठे सपने
कौन कहाँ है ?कष्ट सहा है
कैसी बाजी ? दर्शक जहाँ है
रिश्ते हैं ,जंजीरें हैं,-लकीरें हैं
आर-पार दिखतीं तस्वीरें हैं
लोक लुभावन, सूखा सावन
गीतों की शैय्या पर लेता मन
शब्द जुगाली ,बजती ताली .
आँखों में सोने की जाली
अंधों के बीच सूरज की चर्चा
हवा खोलती ,नया मोर्चा
