STORYMIRROR

Rajesh Kamal

Others

3  

Rajesh Kamal

Others

सर्दियाँ

सर्दियाँ

1 min
282



सर्दियाँ

मौसम नहीं

एक एहसास है,

खुशी का, उत्सव का,

अमीरों की गुलाबी शाम हैं

खनकती हँसी, हाथों में जाम है,

गरीबों के लिए ठिठुरन, बुझती अलाव है,

सुबह जिंदा हैं, यही उत्सव, यही घाव है।


Rate this content
Log in