Pradip Hiwarkhede
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खुली आँखे से देखे गये सपने अक्सर टूट जाते हैं
इतना भी यकीन न करो किसी का
यहाँ सब हुनर सीख चुके हैं बेवफाई का।
जिने देना ए ज...
अफसाने..
बदसुलकी..
तेरी मेरी राह...
कशमकश
कुछ खास तो नह...
घमंड हैं क्या...
कभी कभी लगता ...
बेवजह तो नही ...
रुठे हैं