श्रिमान इरपु.।
श्रिमान इरपु.।
1 min
284
इरपु जी आपका हैं स्वागत
मेरे पाठक उत्सुक है
जानना चाहतें कुछ
आपके बारे मैं
नमस्ते बच्चों
मैं रहता हूँ
ब्रह्मगिरि पर्वत श्रृंखलाओं में
बहता हूँ कर्नाटक और केरल मैं
मेरा स्वच्छ वातावरण
विविध वन्य वह जीव जंतु
सदियों से आज तक
सच मैं मेरे सर का ताज हैं
लोक कथाओं मैं बुना हूँ
रामायण से भी जुड़ा हूँ
इसलिए मुझे लक्ष्मण तीर्थ
का नाम भी दिया गया हैं
मुझ पर स्तीथ मंदिर
मैं करते शिवजी वास
बरसात के मौसम मैं
बन जाता और भी ख़ास
देश विदेश के पर्यटक
आते मुझसे मिलने
आप भी आए थे
अनिरुद्धा दो साल पहले
उम्मीद करता हूँ
किसी दिन होगी मुलाक़ात
४-ड के क्लास से
चलो कहता हूँ अलविदा
क्यूँकि मुझे हैं मिलना
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून वायु से।
