श्रिमान इरपु.।
श्रिमान इरपु.।
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इरपु जी आपका हैं स्वागत
मेरे पाठक उत्सुक है
जानना चाहतें कुछ
आपके बारे मैं
नमस्ते बच्चों
मैं रहता हूँ
ब्रह्मगिरि पर्वत श्रृंखलाओं में
बहता हूँ कर्नाटक और केरल मैं
मेरा स्वच्छ वातावरण
विविध वन्य वह जीव जंतु
सदियों से आज तक
सच मैं मेरे सर का ताज हैं
लोक कथाओं मैं बुना हूँ
रामायण से भी जुड़ा हूँ
इसलिए मुझे लक्ष्मण तीर्थ
का नाम भी दिया गया हैं
मुझ पर स्तीथ मंदिर
मैं करते शिवजी वास
बरसात के मौसम मैं
बन जाता और भी ख़ास
देश विदेश के पर्यटक
आते मुझसे मिलने
आप भी आए थे
अनिरुद्धा दो साल पहले
उम्मीद करता हूँ
किसी दिन होगी मुलाक़ात
४-ड के क्लास से
चलो कहता हूँ अलविदा
क्यूँकि मुझे हैं मिलना
दक्षिणी-पश्चिमी मानसून वायु से।
