STORYMIRROR

Badakhwar

Others

2  

Badakhwar

Others

शब

शब

1 min
160

  

रात के साहिर का तिलिस्म है ये,


निगाहों में बोझल हैं नींद के साए,


सांसें मेरी नम सी हैं,


खुली आँखो से देखे चेहरे कई,


शहर चंपई धूप में धुंधले पड़ गए ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

More hindi poem from Badakhwar

शब

शब

1 min पढ़ें

शब

शब

1 min पढ़ें