STORYMIRROR

Dr. Natasha Kushwaha

Others

4  

Dr. Natasha Kushwaha

Others

मर्यादा

मर्यादा

1 min
310


राम जाने क्यों जीव ही जीव की मर्यादा खोती है

घणी मर्यादा की रेखा नारी की ही होती है


भूल गए क्यों नारी सौ सिंहो पे भारी होती है

दुर्गा जगतजननी की सवारी सिंह ही होती है


शमशान के नृप शिव पे सती बलिहारी होती है

शिमांकन युक्त जीवन ही मर्यादा होती है


मर्याद पुरुषोत्तम श्रीराम आए सुनी सुनाई बात

सीता छवि ज्वलित अग्नि में रखी राम की लाज


जनता की खातिर, बाल्मिकी आश्रम निवास

सिया राम चंद्र जी पूर्णतः मर्यादित विस्वास।



Rate this content
Log in