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Nitu Mathur

Others

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Nitu Mathur

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मरम्मत

मरम्मत

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वो झांकते हैं दरारों से 

कुछ उम्मीद लिए

रूखे होठों की सलवटें हैं

 उधड़ी सी बिना सीए,

ताक रहे हैं अंजान राहों को

के कर जाए कोई मखमली मरम्मत

भरे इन दरारों को एकसार

चांदी से चमकते लेप से,

बनाएं एक झीना सा झरोखा फ़िर

कि दीदार मयस्सर हो मुझे..

दिखाई दे वही गुलाबी हीर।



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