STORYMIRROR

मेरी दोस्त

मेरी दोस्त

1 min
361


ना खुदा खफ़ा है

ना मुहब्बत मुस्तफा है

ज़िन्दगी खुशनुमा हो गयी अब तो

शामो सुबह,

तेरी खुशबू हर दफा है

हम तो मर गए इश्क़ की खाफिफ़ा में

लेकिन आज भी ना खुदा खफ़ा है

ना मुहब्बत मुस्तफा है ।


Rate this content
Log in