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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Children Stories

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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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मेला

मेला

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नदी किनारे लगा था मेला, 

सारे बच्चे मिलजुल गये घूमने

धमा-चौकड़ी सबने खूब मचाई, 

देखा जो हाथी बनाके साथी लगे चूमने


दही, जलेबी, पानी-पूरी, हलवा और कचौड़ी, 

सब बच्चों ने चख-चखकर खाई

फिर सर्कस जाने की पूरी करी तैयारी, 

शेर, लोमड़ी, भालू, चीता और देखा बंदर भाई


एक जगह चटख रहे मक्का के फूले, 

और थोड़ा आगे लाल, हरे, पीले गुब्बारे

सब बच्चों ने थोड़े-थोड़े लिये खरीद, 

धीरे-धीरे सांझ हो गई, शौक हुए न पूरे


चश्मा, चकरी, झुनझुना और बांसुरी, 

खाकर आइसक्रीम लेली टोपी-बंदूक

घूम-घामकर मेला, घर जाने की करी तैयारी, 

गाँव के प्रधानजी खरीद लाये एक संदूक


संदूक रखा ट्रैक्टर की ट्राली में, 

ऊपर चढ़ गये सारे बच्चे

सरपट-सरपट दौड़ा ट्रैक्टर, 

मेला देख हंसी-खुशी घर आये बच्चे।


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