मैं मेरी माँ जैसी
मैं मेरी माँ जैसी
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ममता रूपी छवि माँ की
कभी भुलाई नहीं जाती,
तेरे भोलेपन की मीठी कसक
दिल की गहराइयों में समाई रहती।
तकलीफ किसी की भी
उससे देखी नहीं जाती,
खुद तकलीफ़ सहकर भी
सदा ही वह हँसती रहती।
खुश हो जाती हूँ मैं
सब मुझे हैं कहते,
माँ जैसी ही हँसमुख हो।
माँ से सीखी पाक-कला से
सबको रसास्वादन कराती हूँ,
अन्नपूर्णा प्रसन्न रहे सदा
यह आशीर्वाद बड़ों से पाती हूँ।
मैं माँ जैसी स्वाभिमानी बन
सच की राह पर चलने के
संस्कार अपने बच्चों को देती हूँ,
बेटी ने जन्म-दिवस
पर मुझे बनाकर गुलाब-जामुन,
दिया सरप्राइज-उपहार;
मैं मेरी-माँ-जैसी-तैयार।
