STORYMIRROR

माँ मेरी तंग हाल सी

माँ मेरी तंग हाल सी

1 min
880


माँ मेरी तंग हाल सी

बदन में लपेटे पुराने चिथड़े,

नंगे पैर फटी एड़ियाँ

गहरे हो चले उनमें दरारें,

कभी कभी देखा है मैंने

यूं दरारों से है लहू टपकते,

ना दवाएँ ना मरहम कुछ

धूल से है फटे दरारों को मूंदते।


Rate this content
Log in