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Sourabh Dubey

Others

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Sourabh Dubey

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लगता है जैसे हम बदलने लगे है

लगता है जैसे हम बदलने लगे है

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चलती ज़िंदगानी के साथ हसरते ढलने लगे है ,

लगता है जैसे हम बदलने लगे है।


वो माँ के हांथो से खाना वो पापा के मार पर रोना,

वो भाई के साथ साथ दिन भर लड़ना,

और रात को बेफिक्र हो होकर सो जाना,

अब ये सब इक सपने से लगने लगे है,

लगता है हम बदलने लगे है।


पहले सपनो के रेले थे, ख्वाबों के मेले थे,

अपने एक अलग हीं झमेले थे,

पहले दोस्तों के साथ खूब धूम मचाई थी,

ना कोई गाम ना कोई रुस्वाई थी,

हमने तो अपने लिए एक,

अलग ही दुनिया बसाई थी।


पर आज तो हमारी दुनिया ही अलग है,

खुशियों की एक छोटी सी झलक है,

दर्द का अपार समंदर है, जो बसा हमारे दिल के अंदर है।


आज हर सक्श नाराज सा लगता है,

हसना तो एक ख्वाब सा लगता है,

एक छोटी सी बात पर हम भी रूठ जाते है,

हलकी हवा के झोके से टूट जाते है।


अब तो सारे अरमान भी जलने लगे हैँ,

लगता है जैसे हम बदलने लगे है।


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