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Jai Kumaar

Others

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Jai Kumaar

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ख़ुद को भूल जाता है

ख़ुद को भूल जाता है

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समझता है सब को ख़ुद सा हमेशा, 

औरों के लिए ख़ुद को भूल जाता है। 


ख़ुद भटका हुआ है यहाँ दर-ब-दर,

पर दोस्तों को सही राह दिखाता है। 


कहीं कदर नहीं ज़रा, है कोई मतलबी, 

फरेबी दुनिया में कैसे दिल लगाता है। 


कैसा पागलपन है 'कुमार' सोच ज़रा,

क्यों तू ख़ुद को इतना ज्यादा सताता है। 


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