STORYMIRROR

Jai Kumaar

Others

3  

Jai Kumaar

Others

ख़ुद को भूल जाता है

ख़ुद को भूल जाता है

1 min
163

समझता है सब को ख़ुद सा हमेशा, 

औरों के लिए ख़ुद को भूल जाता है। 


ख़ुद भटका हुआ है यहाँ दर-ब-दर,

पर दोस्तों को सही राह दिखाता है। 


कहीं कदर नहीं ज़रा, है कोई मतलबी, 

फरेबी दुनिया में कैसे दिल लगाता है। 


कैसा पागलपन है 'कुमार' सोच ज़रा,

क्यों तू ख़ुद को इतना ज्यादा सताता है। 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन