खोया हूँ
खोया हूँ
1 min
160
खोया हूँ ना जाने कहाँ,
तू है नहीं मुझमें कहीं,
बिखर रहा हूँ शौक़ से,
अपने सपने इस जीवन
के मैं हूँ, तन्हा हमराही,
सुन ज़रा तू भी है मेरा,
जिस पल गुज़रे सफ़र,
ख़ामोश है,ज़िन्दगी से,
अपनी पूछना तू ज़रा,
उन रास्तों से जाना है,
जिधर उधर फिर कहाँ।
