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Hardik Mahajan Hardik

Others

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Hardik Mahajan Hardik

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खोया हूँ

खोया हूँ

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खोया हूँ ना जाने कहाँ,

तू है नहीं मुझमें कहीं,

बिखर रहा हूँ शौक़ से,

अपने सपने इस जीवन

के मैं हूँ, तन्हा हमराही,

सुन ज़रा तू भी है मेरा,

जिस पल गुज़रे सफ़र,

ख़ामोश है,ज़िन्दगी से,

अपनी पूछना तू ज़रा,

उन रास्तों से जाना है,

जिधर उधर फिर कहाँ।


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