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Hardik Mahajan Hardik

Others

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Hardik Mahajan Hardik

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खेल रहे हैं

खेल रहे हैं

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खेल रहे हैं कान्हा राधा संग बृज में होली।

खेली राधा ने कान्हा संग प्रीत की होली।


      कोई रंग ना बिखरा,

      ना  गुलाल वो उड़ाया।

      सुंदर सा रूप उनका,

      बस प्रेम का  निहारा।


मेरी कल्पना सुनलो, आओ खेले होली।

यही बात मैंने तुमसे, नहीं जहाँ बोली।  


      गोपी के  संग रासलीला,

      बृज में कान्हा करता।

      सुंदर रूप  मनमोहना,

      राधिका संग खेले होली।


रास रचाओ बृज में, आओ खेले होली।

बृंदावन में धूम मची, कान्हा खेले होली।


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