कांटे नहीं पत्ते बने...
कांटे नहीं पत्ते बने...
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कांटे बनकर क्या फ़ायदा...
जो हमेशा बस चुभें...
बनना है तो पत्तों की तरह बनों...
जो काम आने पर...
थाली बन जाते है...
बैठने के लिए बिछा लिए जाते हैं...
फूलों के बीच उनकी शोभा बढ़ाते हैं...
पेड़ पर लगे पत्ते ही छाँव देते हैं...
और सूखकर गिरकर भी सुंदरता... बढ़ाते हैं...
