जनता भी याद रखती है...
जनता भी याद रखती है...
1 min
212
नेता अब सभी परोस रहे हैं
आंकड़ों के कुरकुरे बताशे
मगर जनता भी याद रखती
है अस्मिता से जुड़े तमाशे
जनता ही जनार्दन है शायद
इस सत्य को गए सब भूल
जनता जो रूठी तो दिग्गजों
को भी फांकनी पड़ती धूल
वायदों की भूल भूलैया से
जब जनता जाती है ऊकता
तो सियासी दलों को अर्श से
फर्श पर पटक देती है बिखरा
इस चुनाव में जरूर दिखेगा
धरती पुत्रों का दिली आक्रोश
राजनीति ने जिन्हें 13 माह तक
बनाए रखा देश में ही खानाबदोश।
