STORYMIRROR

Shubham mohurle

Others

3  

Shubham mohurle

Others

जिसका जनम और मृत्यु तू ही हो,,

जिसका जनम और मृत्यु तू ही हो,,

1 min
324

जिसका जनम और मृत्यु तू ही हो

कुछ मंजिल पाने के लिए हम कुछ करते थे

कुछ मंजिल खोने के लिए भी हम कुछ करते है

जिस दिन हम कुछ सोच समझकर बोलते है

वही एक दिन किसी के ना किसी के जीवन मे होता ही है

बस एक ख़्वाहिश थी हमारी लफ्जों को

संभाला और आँसू को मिटाने की

पर वह भी एक होता है जिंदगी का पल

जब हमारी मंजिल भी टूट जाती है आसमान छूकर

ओर गिर पड़ती है बर्फ के बाढ़ जैसी टूटकर

न सम्भल पाए खुद को ओर न समझा करे किसी ओर को

तब बारिश भी गिर पड़ती है ओर रोते हुए कहती है

मेरे जैसी हालात तेरी भी है ऊपर वाले ने फेक दिया तो नीचे गिरना

पर भी मैं सम्भालती खुद को ओर बह जाती समन्दर के तट तक

जहा अंजान भी अपने हो जाये

वैसा ही तू बह जा मेरे जैसा खुद में

जिसका जनम ओर मृत्यु तू ही हो,,

ओर गिरकर उठने वाला भी तू ही हो ,



Rate this content
Log in