STORYMIRROR

Deep Panchal

Others

2  

Deep Panchal

Others

जीवन का अमृत

जीवन का अमृत

1 min
223

सत्य भले ही गया हो मर

तू मन में उम्मीद का दीप जलाकर,

चलना उसी की राह पर।

 

यदि तू गिर पड़े राह में,हौसला कम ना हो विश्वास में,

तू फिर उठके चल जीत की चाह में।

 

जीत के गीत गाए जा,

तू दीप से दीप मिलाए जा,

उस लौ की ज्वाला बनाएं जा।

 

ज्वाला बना तू इतनी विशाल,

के सूर्य भी नमे तेरे द्वार,

आएगा फिर सतयुग का काल,

तब होगा अमृत का साक्षात्कार।





विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन