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Sarita Saini

Others

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Sarita Saini

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इश्क़

इश्क़

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ख़त्म होकर भी थोड़ी सी रह जाती है,

ये मोहब्बत है पूरी तरह से कहाँ जाती है,


रह-रह के ये अक्सर रातों को तड़पाती है,

दिल की बात कहाँ किसी से बयां हो पाती है,


वक्त बेवक्त कभी भी ये कहर बन के दिल पे छा जाती है, 

ये इश्क़ है जनाब इंसान को खोखला कर जाती है ।



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