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gps pangriyana hindaw

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हिन्दी की व्यथा

हिन्दी की व्यथा

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अंग्रेजों ने नींव रखी थी,

अंग्रेजी विस्तार बढ़ाने की।

अपने ही जयचंद बने हैं पश्चिमता अपनाने को

गांधी, भगत की शहादत ने देश को गुलामी से बचा दिया,

पर न जाने कब फिरंगी भाषा चुंगल से मुक्ति पायेगा

अंग्रेजी को विकास समझकर, हिन्दी का उपहास उड़ाया है।

स्पर्धा के इस दौर में हिन्द को भरमाया है

1947 के पूर्व गुलामी का दौर फिर आया है।

आम आदमी का अंग्रेजी जड़त्व तो क्या बोले,

पर क्या प्रशासनिक जड़त्व कम कर पाएंगे

जन मन में अंग्रेजी लेखन घर कर आया है

लार्ड मैकाले की ब्रिटिश अवधारणा को बढ़ाकर,

1835 शिक्षा नीति को फैलाया है।

मातृ भाषा में देश का बचपन गूँजा है,

आओ हम सब मिलकर फर्ज निभाएंगे

बच्चे - बच्चे के अन्दर में हिन्दी प्रेम जगाएंगे

हिन्दी है परम प्रिय भाषा सब को यह समझाएंगे

फिर विश्व में हिन्दी का परचम लहराएगा।

     


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