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Hardik Mahajan Hardik

Others

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Hardik Mahajan Hardik

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हाँ सच है

हाँ सच है

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हाँ सच है.....

बात कहाँ से निकलती है,

और कहाँ ख़त्म होती है,

हाँ सच है.....

बात शुरू होती है,

और ख़त्म नहीं होती है,

हाँ सच है....

उड़तें परिंदों की तरह,

लोग लापरवाह हो जाते हैं,

हाँ सच है....

बनती बिगड़ती बातों को,

कहाँ से कहाँ ले जाते हैं,

हाँ सच है....

बुराइयाँ तो सब करते हैं,

पर भलाई नहीं कोई करता है,

हाँ सच है....

हर बार इक नया बहाना बनाते हैं,

हाँ सच है....

डाली पर बैठा पक्षी भी उस

कमज़ोर डाली से ज़्यादा,

अपने पँखों पर भरोसा करता है।


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