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pali kaur

Others


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pali kaur

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हाइकु कविता

हाइकु कविता

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गोधूलि बेला 

अलसाये प्रकृति 

सूरज मौन। 


तपता सूर्य 

विहल विरहिणी 

ढूँढती छाँव। 


प्रचंड रवि 

व्याकुल कायनात 

प्रकृति मौन। 



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