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Sumit Shukla

Others

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Sumit Shukla

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चांद!!

चांद!!

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चांद को यूं आज बादलों ने घेरा है,

जैसे चांद बादलों से कह रहा है तू सनम मेरा है,

तू ही मेरी शाम तू ही मेरा सवेरा है,

बेवजह बेवक्त गुनगुनाते हर साज का सार तू मेरा है,

जैसे चांद का सनम बादल वैसे सनम इश्क तू मेरा है,

चांद को यूं आज बादलों ने घेरा है।।


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