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Vinay Pandey

Others

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Vinay Pandey

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बसंत ऋतु

बसंत ऋतु

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लेकर बसंत आ गया, मौसम में भर प्यार।

रंग हवा का बदल कर, देता है मनुहार।।


लिपट रहे ऋतुराज हैं, अलियाँ कलियाँ देख।

प्रेम - प्रीति मधुमास में, उत्सव लिए अपार।।


सौरभ भरता जा रहा, अति मादक सुगंध।

ऋतुराज आनंद लिए, तोड़ रहे अनुबंध।।


भरते मन उत्साह से, जगत धरा में आज।

नये सृजन के साथ, ही, जोड़ रहे संबंध।।


ऋतुराज आये मिलने, धरा सजी है आज।

प्रकट हुई हैं भारती, वीणा पुस्तक साज।।


कलाकार भरने लगे, अंतस सारे चित्र।

कलम तूलिका रंग से, करते सभी सुकाज।।


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