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Hardik Mahajan Hardik

Others

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Hardik Mahajan Hardik

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बिखेर के सारे

बिखेर के सारे

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बिखेर के सारे स्वप्न अपने,

आज राह अपनी थाम लूँ।

बुनकर सारे ख़्वाब अपने,

आज मै सारे स्वप्न देख लूँ।

सिमट के रखें स्वप्न अपने,

आज सारे स्वप्न मै भर लूँ।

आँखों ही आँखों में अपने,

देखें स्वप्न "हार्दिक" बुन लूँ।


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