बचपन की अनमोल यादें
बचपन की अनमोल यादें
वो बचपन ही सबसे प्यारा था,
वह बारिश का मौसम ही न्यारा था,
कागज की कश्ती हुआ करती थी,
पानी में हिलती- डूलती वो कश्ती,
जिसे देखकर आंखों में रौनक
आया करती थी।
बरामदे में रस्सी से बना हुआ एक झूला
हुआ करता था,
झूले में बैठने के लिए एक दूसरे से लड़ना,
फिर सबका बारंबार उस पर बैठना
कितना प्यारा था,
वो बचपन हमारा कितना प्यारा था।
छुपन छुपाई और गुड्डे गुड़ियों का जमाना था,
सबके लिए यह खेल खजाना था।
पेड़ में चढ़कर झूलना और छलांगे मारना,
मिट्टी में खेलना उसका एक दूसरे के
ऊपर फेंकना कितना प्यारा था,
वो बचपन कितना प्यारा था।
गलती करने पर पापा की डांट से बचने के लिए,
मां के आंचल में छुप जाना, और कभी ना चलने पर
मां की गोद में आने के बहाने बनाना।
मां का वो रात को लोरियां सुना कर हमें सुलाना,
और मां के पास सोने के लिए भाई बहन से
झगड़ा करना कितना प्यारा था।
हंसने खेलने के सिवा ना कोई परेशानियां ना
गम हमारे पास था,
वो बचपन ही था जो सबसे खास था।
