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AKIB JAVED

Children Stories

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AKIB JAVED

Children Stories

बच्चे

बच्चे

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दुनिया की परवाह से अंजाने होके

अंतर्द्वंद को मारकर ये बेगाने होके


घर, स्कूल, रिश्ते सारे नाते तोड़कर

बच्चे करते है मन की दीवाने हो के


सैर-सपाटा, उछल-कूद में होते मग्न

अपनी ही दुनिया में है वो होते लग्न


परवाह कहाँ रहती है अपने कल की

बच्चे साथियों संग खेलते रहते मग्न।


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