Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!
Buy Books worth Rs 500/- & Get 1 Book Free! Click Here!

बारिश की कहानी

बारिश की कहानी

2 mins 176 2 mins 176

हर बारिश अपने में एक कहानी है

किसान के लिए सूखे में वरदान तो बाढ़ में तबाही है

शहर में ट्रेफिक तो स्कूल में छुट्टी की किलकारी है

प्रेमियों के अरमानों को फिर भिगोने की फरमानी है


चाहो तो स्वागत करके तन मन भिगो डाले

नहीं तो कहीं दुबक कर या भीगने के डर से

अपने को कहीं छुपा डालें

या अपनी यादों के दर्पण में फिर वही मंजर दोहरा डाले


बारिश में भीगने वाले से जरा पूछो कि उसका क्या कहना है

पानी से बचने के लिए उसने क्या क्या कर डाला है

कहीं छतरी उड़ी जाती है कहीं पैर पानी में छप्प से अंदर चला जाता है

कपडों को कीचड़ से बचाना भी अपने में एक लड़ाई है

तभी हर बारिश अपने में एक कहानी हैं


कभी उसके साथ रास्ते में चल दिए कि अचानक बारिश ने घेरा

पकड़ कर हाथ किसी दुकान की परछत्ती तले या पेड़ के नीचे

अपने को कम उनको भीगने से बचाना रहा ज्यादा जरूरी

पर मन में एक बात जरूर आती कि काश यह बारिश ऐसे ही बरसती रहे

तभी हर बारिश अपने में एक कहानी है


उसको घर तक छोड़ने का अरमान किया बारिश ने पूरा

हर जाने वाले रिक्शे को रोक उसमें बैठने की उनका जल्दी मचाना

खुले रिक्शे में बैठकर दुपट्टे से अपने को ढांपकर पानी से बचाना

पानी का हर जुल्फ से बहकर चेहरे में जाकर मुझे भिगोना

तभी हर बारिश अपने में एक कहानी है


उसको घर की सीढ़ियों तक छोड़ वापस आना

आकर घंटो तक बारिश को ताकना

हर एक पिछले पलों को याद करना

गीले कपडों को बार बार छूकर देखना कि कहीं सूखे तो नही

तभी हर बारिश अपने में एक कहानी है


बारिश आज भी हो रही है

हाथ में चाय की प्याली पकड़ खिड़की से नजारे दिख रहे

आज भी एक लड़का लड़की उसी तरह बारिश से बच रहे

आज भी एक जोड़ा रिक्शे में बैठकर जा रहा, वही दुपटटा हवा में लहरा रहा

आज भी हर वो मंजर याद आ रहा

तभी हर बारिश अपने में एक कहानी हैं


Rate this content
Log in