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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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वैष्णव चेतन "चिंगारी"

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बाल गीत (64 )

बाल गीत (64 )

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आओ बच्चों इस होली में हम,

मिलकर कुछ अलग खेले हम,

जात-पात और गरीब-अमीर,

हम सबको गले लगाकर इस बार,

अनोखी होली का रंग खेले इस बार,

कोई भी न रह जाये वंचित इस बार,


मिठाइयां हम सब खाएँ मिलकर इस बार,

उनको भी बांटे जो है सक्षम नहीं इस बार,

अपनी टोली की भी मिलाएं उनके संग इस बार,

सब हिल-मिलकर खेले यह रंगों का त्यौहार,

जो बन जाए अपने आप एक मिसाल इस बार 

ऐसी नई आज एक रीत चला दे हम इस बार !!


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