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Sonu Saini

Others

5.0  

Sonu Saini

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अलिक्सान्दर पूश्किन

अलिक्सान्दर पूश्किन

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सलामत रखना मुझे, ए मेरे ताबीज़, 

ज़ुल्म के साये से पश्चाताप की आग से,

बचाकर रखना तन्हाई के अंगारों से,  

यूँ ही नहीं मिला था उन पलों में ताबीज़ ।


जब सागर बनाए भयानक तस्वीर

लहरें समुद्र की मुझ पर उमड़ पड़ें,  

जब खूँखार बादल गरजें दहाड़ें,

सलामत रखना मुझे, ए मेरे ताबीज़।


परदेस में तन्हाई के पल में नाचीज़,

उस खामोशी में उस उदासी में, 

ख़ुद से ख़ुद की मेरी लड़ाई में,

सलामत रखना मुझे, ए मेरे ताबीज़।


नायब पाकीज़ा धोखा है लजीज़,

रूह का जादुई सा झरोखा है

बदल गया है वो छिप गया है

सलामत रखना मुझे, ए मेरे ताबीज़।


काश दिल के ये घाव अजीज़  

मेरे फिर कहीं से हरे न हों जाएँ ।

उम्मीद, चैन, नींद न कहीं खो जाएँ; 

सलामत रखना मुझे, ए मेरे ताबीज़।



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