ऐ नारी तू है तो है हम
ऐ नारी तू है तो है हम
ऐ नारी तू है तो हैं हम, दिया तूने ही सब को जन्म
लड़की लड़का हो या संत अवतार हो तेरे कारण हुआ है जन्म
लालन पालन भी तू ही करें दिल से सेवा तू सब की करे
तेरे मन में है जो कोमल भावना दुःख दर्द भी दूर करे
अपना हाथ जो सर पर रखे, तू आशीष बनकर फले
हर खुशी फिर मिले यह जीवन भी खिले साथ तेरा हमें जब मिले
तेरे हौसले से ही हम में है दम, चले साथ जो तू हर कदम
तेरी मुस्कान से ही खिलता सदा खुशियों का चमन
ऐ नारी.........
सीता बनकर कभी चली वनवास तू
मीरा बनकर कभी वन चली
प्रेम निभाया तूने हर हाल में चाहे ज़हर की प्याली मिली
ज़हर अमृत बना भावना थी तेरी जो सरल
झुक गया हर कोई ऐसी देखी जो प्रेम लगन
तेरे नक्शे कदम कर चले हर कोई किए तूने जो अच्छे कर्म
ऐ नारी.......
संकट आया कभी देश पर, हाथ में थाम तलवार ली
बन झांसी की रानी दुश्मन पर थी टूट पड़ी
बांधकर सर अपने कफन, चल पड़ी थी तू मैदान में
सर झुकने न दिया, दिया बलिदान आई जो घड़ी
जब तक साँस थी डटकर थी खड़ी,
फिर जमीं पर थी आन पड़ी ऐ नारी.....
नारी कमजोर है तू नहीं हर विपदा में डट डटकर खड़ी
परिवार हो या समाज हो देश ख़ातिर भी तू थी लड़ी
तेरे बाजुओं में है इतना तो दम, डगमगाए ना तेरे कदम
राह कैसी भी हो हौसले से तेरे टकराए ना कोई भी जान
ऐ नारी तू है तू है हम............
