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Kawaljeet Gill

Abstract


5.0  

Kawaljeet Gill

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काश कोई

काश कोई

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काश कोई मजनू की तरह

हमारा भी दीवाना होता,

तो हम भी लैला की तरह उस

पर अपनी जान निसार कर देता,


पर अफसोस असज कि दुनिया में

लैला तो कोई नजर आ जाए,

पर मजनू सा दीवाना कोई

हमको नजर नहीं आता,


आज के दीवाने तो प्यार

किसी से करते हैं,

वादे किसी और से करते हैं

और निभाते किसी और के संग है,


उस पर भी आलम ये है कि

बदनाम वो लैला को करते हैं,

कोई भी लैला की तरह आज के

मजनू पर आँख बंद करके विश्वास करे,

जाने कब कोई मजनू सा दीवानापन

दिखाकर धोखा दे जाए,


वो दौर औऱ था जब लोगों को

प्यार की कद्र हुआ करती थी,

आज के आशिक प्यार के कम

दौलत के ज्यादा दीवाने हैं,


प्यार की राहों पर चलना है तो

जरा सोच समझकर चलना,

आग का एक दरिया है इश्क़ ओ मोहब्बत

और पार इस को करना आसान नहीं।


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