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इस बिदाई का अब सिलसिला कुछ न हो अजनबी ज़िन्दगी भर रुलाता रहा इस बिदाई का अब सिलसिला कुछ न हो अजनबी ज़िन्दगी भर रुलाता रहा
नज़र उनकी झुकी कुछ हुआ तो नहीं लब बस हिले ही थे कुछ कहा तो नहीं। नज़र उनकी झुकी कुछ हुआ तो नहीं लब बस हिले ही थे कुछ कहा तो नहीं।
करवटें बदलता बदन ये तुम्हारा तपन ये जलाकर बुझाई गयी है करवटें बदलता बदन ये तुम्हारा तपन ये जलाकर बुझाई गयी है
आज अम्मी परदे से तलाक मांगती हूँ बस अच्छी तालीम का हक मांगती हूँ। आज अम्मी परदे से तलाक मांगती हूँ बस अच्छी तालीम का हक मांगती हूँ।