Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
अनकही
अनकही
★★★★★

© Sharad Kokas

Others

1 Minutes   13.8K    4


Content Ranking

 

वह कहता था

वह सुनती थी

जारी था एक खेल

कहने सुनने का

 

खेल में थी दो पर्चियाँ

एक में लिखा था ‘कहो’

एक में लिखा था ‘सुनो’

 

अब यह नियति थी

या महज़ संयोग

उसके हाथ लगती रही

वही पर्ची

जिस पर लिखा था ‘सुनो’

वह सुनती रही

 

उसने सुने आदेश

उसने सुने उपदेश

बंदिशें उसके लिए थीं

उसके लिए थीं वर्जनाएं

वह जानती थी

कहना सुनना नहीं हैं

केवल हिंदी की क्रियाएं

 

राजा ने कहा ज़हर पियो

वह मीरा हो गई

ऋषि ने कहा पत्थर बनो

वह अहिल्या हो गई

प्रभु ने कहा घर से निकल जाओ

वह सीता हो गई

 

चिता से निकली चीख

किन्हीं कानों ने नहीं सुनी

वह सती हो गई

 

घुटती रही उसकी फरियाद

अटके रहे उसके शब्द

सिले रहे उसके होंठ

रुंधा रहा उसका गला

 

उसके हाथ कभी नहीं लगी

वह पर्ची

जिस पर लिखा था - ‘कहो’

 

 

 

अनकही शरद कोकास sharad kokas kokas amrita pritam vagarth

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..