Quotes New

Audio

Forum

Read

Contests

Language


Write

Sign in
Wohoo!,
Dear user,
आइना
आइना
★★★★★

© Gobind Chanda

Others

1 Minutes   13.6K    3


Content Ranking

आइना

अब छपने लगे हैं किताबों में

चर्चाएं  होने लगी है बाजारों में

कल रिसाला माँगेगा हम से कविता

जो हमारी पसंदीदा हो और

कोई अखबार भी चिपकाएगा

हमें किसी पन्ने पर ......

 

समाज रचना के साथ

रचनाकार को भी पढ़ता है

 

अब एक स्तम्भ जा रहे बनने

हमें दर्पण बनना है समाज का

आओ , स्वयं को देख लें जरा

एकबार आईने में

 

इससे पहले हमारी कृति पर

उठाए जाएं सवाल

आओ ढूँढ लें मिलकर जवाब

 

कल को कोई ये न कहे

लिख तो रहे कविता

फिर भी क्यूं नहीं समझते

कविता की आत्मा को

कविता के मौन को

कविता की भाषा को

 

हाँ, अब हमें बदलना होगा

बनना होगा हमें

एक उत्कृष्ट आईना

जिसमें स्पष्ट देख सके हमें समाज

और साफ कर सके धूल

सदियों पुरानी जमी है

 

इससे पहले हम खारिज किए जाएँ

आओ ! देख लें आईने में

स्वयं को एक बार 

गोबिन्द

आइना

Rate the content


Originality
Flow
Language
Cover design

Comments

Post

Some text some message..