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 अब, बहुत हो गया !
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© Shailesh Bhaarat

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वृत्त की परिधि में बैठे हैं
दो शत्रु , विनाशक 
हाथ मिलाकर
एक बहलाकर लूटता है
दूसरा खुलेआम 
घात लगाकर ।

छोड़कर अपनी जगह 
चले जा रहे साथ इनके 
डरे - डरे बेवजह 
न जाने किसके हाथ लगें, हम 
कटी पतंग की - सी डोर
भला घर का ताला खोलने के लिऐ
अब , अनुमति सरकार से क्यूँ लें ?

 

शत्रु घात

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