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खिड़की
खिड़की
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© Gunja Ojha

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आज मैंने खिड़की से बाहर देखा!
पेड़ो को झुमते, चिड़ियों को गाते देखा
आज मैंने खिड़की से बाहर देखा!
देखे मैंने मौसम हजार, मौसम को बदलते देखा
आज मैंने खिड़की से बाहर देखा!
लोगों को लड़ते, कुछ को लड़ते हुए को मनाते देखा
आज मैंने खिड़की से बाहर देखा!
कुछ को काम पर जाते, कुछ को आते देखा
आज मैंने खिड़की से बाहर देखा!
कहीं राजनीति करते हुए नेताओं को देखा,                       वहीं हमारे आदर्श बापू को भी देखा
आज मैंने खिड़की से बाहर देखा! 

जिन्दगी में खुश रहना और आसपास रहने वालों को खुश रखना मेरी आदत है।

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