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साजना....
साजना....
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© Sanjay Maurya

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छिपा चाँद जाने किधर साजना ,
बुझी चाँदनी इस क़दर साजना ।

हुई रात काली गवाँ रौशनी ,
लगी है इसे क्या नज़र साजना ।

दिखाई न दे कुछ सुनाई न दे ,
अँधेरी हुयी सब डगर साजना ।

ग़जब आसमाँ यूँ हुआ चाँद बिन ,
लगे ठूठ जैसा शज़र साजना ।

तिरा साथ चाहूँ चली आऊँ मैं ,
जहाँ तू कहे औ जिधर साजना ।

प्रेम विरह

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