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Dinesh Dubey

Children Stories Inspirational

4  

Dinesh Dubey

Children Stories Inspirational

सुखी कौन

सुखी कौन

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एक वन में एक कौवा रहा करता था, वैसे उसे कोई कष्ट नहीं था और वह अपने जीवन से पूरी तरह संतुष्ट था।ऐसे ही एक दिन उड़ते हुए वह एक सरोवर के किनारे पहुँचा, वहाँ उसने एक उजले सफ़ेद हंस को तैरते हुए देखा। 

कौआ उसे देखकर यह सोचने लगा, “यह हंस कितना सौभाग्यशाली है, जो इतना सफेद और सुंदर है। और मुझे देखो, मैं कितना काला और बदसूरत हूँ। ये हंस अवश्य इस दुनिया का सबसे सुखी पक्षी होगा।”


कौआ उड़कर हंस के पास गया और अपने मन की बात उसे बता दी। उसकी बात सुनकर हंस बोला, “नहीं मित्र ! वास्तव में ऐसा नहीं है। पहले मैं भी सोचा करता था कि मैं इस दुनिया का सबसे सुंदर पक्षी हूँ। इसलिए बहुत सुखी और खुश था।लेकिन एक दिन मैंने तोते को देखा, जिसके पास दो रंगों की अनोखी छटा है, उसके बाद से मुझे भरोसा है कि वही दुनिया का सबसे सुंदर और सुखी पक्षी है।"


हंस की बात सुनने के बाद कौवा तोते के पास गया और उससे पूछा " तोता राम क्या तुम दुनिया के सबसे सुखी पक्षी हो?"

उसकी बात सुन तोते ने उत्तर दिया, “मैं बहुत ही खुशगवार मस्ती भरा जीवन व्यतीत कर रहा था, पर जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था, किंतु अब मुझे लगता है कि मोर से सुंदर तो कोई हो ही नहीं सकता।”इसलिए मोर ही दुनिया का सबसे सुखी और खुश पक्षी है।"


यह सुनने के बाद कौवा मोर की खोज में निकला। उड़ते-उड़ते वह एक चिड़ियाघर पहुँचा, वहाँ उसने देखा कि मोर एक पिंजरे में बंद था, और उसे देखने के लिए बहुत सारे लोग एकत्र हुए थे ।


सभी लोग मोर की बहुत सराहना कर रहे थे, सबके जाने के पश्चात कौवा मोर के पास गया और उससे बोला, “तुम कितने सौभाग्यशाली हो, जो तुम्हारी सुंदरता के कारण हर रोज़ हजारों लोग तुम्हें देखने आते हैं, मुझे तो लोग अपने आस-पास भी फटकने नहीं देते और देखते ही भगा देते हैं, तुम इस दुनिया के सबसे सुखी और सुंदर पक्षी हो ना?”


कौवे की बात सुनकर मोर उदास हो गया।


मोर कौवे से बोला, “मित्र! मुझे भी अपनी सुंदरता पर बड़ा घमंड था। मैं सोचा करता था कि मैं इस दुनिया का क्या, बल्कि इस पूरे ब्रम्हाण्ड का सबसे सुंदर पक्षी हूँ। इसलिए खुश भी बहुत था। लेकिन मेरी यही सुंदरता मेरी शत्रु बन गई है और मैं इस चिड़ियाघर में बंद हूँ। यहाँ आने के बाद इस पूरे चिड़ियाघर का अच्छी तरह मुआयना करने के बाद मैं इस नतीजे पर पहुँचा हूँ कि कौवा ही एक ऐसा पक्षी है, जो यहाँ कैद नहीं है। इसलिए पिछले कुछ दिनों से मैं सोचने लगा हूँ कि काश! मैं कौवा होता, तो कम से कम आज़ादी से बाहर घूम सकता और तब मैं इस दुनिया का सबसे सुखी और खुश पक्षी होता।”

कौवा यह सुन बहुत खुश होता है और वहां से उड़ जाता है।

इस कहानी से हमे यह दिख मिलती है ,हम हमेशा दूसरों को देखकर व्यर्थ ही स्वयं की तुलना उनसे करने लगते हैं और दु:खी हो जाते हैं, भगवान ने सभी को अलग अलग बनाया है और अलग अलग गुण दिए हैं, हम उसका महत्व नहीं समझते और दु:ख के चक्र में फंस जाते हैं, इसलिए दूसरों के पास जो है, उसे देखकर ईर्ष्या करने के बजाय हमें हमारे पास जो है, उसके साथ खुश रहना सीखना चाहिए।


खुशी बाहर ढूंढने से नहीं मिलती, वह तो हमारे अपने अंदर ही छिपी हुई होती हैं



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