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Vimla Jain

Others

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परी के पापा

परी के पापा

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जी हां मैं मेरे पापा की परी थी। वह मेरे को मेहता परिवार का ज्वेल कहते थे। इतने प्यारे मेरे प्यारे पिताजी जिनको की हम लोग बाऊ साहब बोलते हैं। बहुत ही अच्छे नेक इमानदार सुलझे हुए विचारों वाले बहुत ही इज्जत दार इंसान थे।उन्होंने अपनी जिंदगी में इतने अच्छे अच्छे काम करें ,कि लोग उनकी मिसाल दिया करते थे। मैं घर में सबसे छोटी थी ।

वह हम सब भाई बहनों को बहुत प्यार करते थे मगर छोटी होने के कारण मेरा उनकी जिंदगी में कुछ विशेष स्थान रहा। उनको पढ़ने लिखने का और पढ़ाने का बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने का बहुत ही शौक था।और उन्होंने अपनी सीमित आय में भी हम सबको बहुत ही अच्छी शिक्षा दिलवाई भाई लोगों को भी उच्च शिक्षा दी और हम लोगों का बहुत ही अच्छा पालन पोषण किया।

वे अपनी जिंदगी में बहुत ऊंचे ऊंचे ओहदो पर रहे। फर्स्ट चीफ मिनिस्टर के पीए व बहुत सालों तक अर्बन मिनिस्टर के पीए रहे फिर विधानसभा में कमेटी ऑफिसर थे उन्होंने अपनी सर्विस बहुत ईमानदारी से करी। वे हिंदी साहित्य विशारद और सब भाषाओं के अच्छे जानकार थे।

उन्होंने शॉर्ट हैंड में महारत हासिल कर रखी थी ।बाद में रिटायरमेंट के बाद वे हमारे जैन साधु जी महाराज, गुरु महाराज के व्याख्यान को शॉर्टहैंड में लिखकर हिंदी ट्रांसलेट करके बुक्स भी निकालते थे। इतने विद्वान थे।

मुझको तो वे बहुत ही प्यारे थे। मेरे को उनका असीम प्यार मिला ।

आज भी हम को उनकी बातें ,उनकी वह पीली थैली जिसने वे हमारे लिए बहुत सारी चीजें भरकर लाते थे। शाम को 3:00 बजे और उनकी मुन्नी चाय बना साथ में कई खाउणो भी लेन आवजेऔर खासतौर से उन्होंने मेरी हर इच्छा का मान रख कर वादे के अनुसार मेरी डॉक्टर से शादी इतना अच्छा परिवार सब दिया।

उनका हमारे साथ बहुत गहरा संबंध रहा ।शादी के बाद भी वे हर साल हमको देखने आते। एक महीना हमारे साथ बिताते। हमको बहुत अच्छा लगता । उनके लिए लड़का लड़की में कोई फर्क नहीं था ।सब बच्चे बराबर थे। यह दहेज विरोधी थे बहुत उसूलों वाले थे ।और किसी से डरते नहीं थे। समाज से भी उनको डर नहीं लगता था। जो सही है वही करते थे ।

मुझको वे अपने हर दोस्त से मिलवाते थे ।और हमेशा बोलते थे कि मुझे इस पर गर्व है। इतने प्यारे थे मेरे बाऊ साहब

अंत समय में 10 साल वे बिस्तर में रहे। कोमा में भी चले गए थे। मेरी बाई जी और भाई साहब भाभी जी ने उनकी बहुत सेवा करी। उनको हमसे बिछड़े हुए 20 साल हो गए हैं। मगर वे आज भी हमारे दिल में जिंदा है।कभी भी हम उनको भूल नहीं सकते वे थे तो हम हैं । उनके नीति नियम संस्कार हमारी धरोहर है। जिसको हमने आगे बढ़ाया है । बाबू साहब आपको आपकी मुन्नी का सादर नमन ।

ईश्वर आपकी आत्मा को शांति दे, ओम अर्हम।



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