पलक की तक़दीर
पलक की तक़दीर
“पलक, सुबह सुबह किचन में क्या कर रही हो”, किचन से आवाज़ सुन, सुमेद ने बेडरूम से तेज आवाज़ लगाई।
“अरे भूल गए क्या, आज कौन आ रहा है, उसके ही लिए शाम के स्पेशल डिनर की तयारी कर रही हु” पलक ने किचन से ही जवाब दिया।
“पलक, एक मिनट, तुम्हे कुछ करने की जुररत नहीं है” बेडरूम से तेज कदमो से चलते हुए किचन की तरफ आते हुए सुमेद ने कहा।
“क्यों जरुरत नहीं” सुमेद की बात को बिच में ही काटते हुए पलक ने अचम्बे से पूछा।
“अरे तुम टेंशन मत लो मे ने पहेले ही सब तैयारी कर ली है, खाने के लिए होटल में टेबल बुक कर दिया है। हम लोग स्टेशन से डायरेक्ट होटल जायेगे और फिर वहा से उन लोगों को लेकर घर आ जायेगे, तुमे परेशान होने की ज़रूरत नहीं, तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है, तुम आराम करो, तैयार रहना, मै ऑफिस से जल्दी आता हु, फिर हम स्टेशन साथ चलेगे, सुमेद ने पलक के कंधे पे हाथ रख उसे आराम करने के लिए बेडरूम की तरह ले जाते हुए कहा।
दोनों ने कमरे में ही नास्ता किया, पलक को आराम करने को कहे, तैयार हो, सुमेद ऑफिस के लिए निकल गया। सुमेद के जाने के बाद, पलक यूही पलंक पर लेटी रही, उसे नींद नहीं आ रही थी, उसके दिमाग में, शाम को आने वाले मेहमान के बारे में ही सोच चल रही थी। जैसे तैसे कर, थोड़ी देर आराम करने के बाद, अपना मन बहेलाने के लिए, पलक उठकर किचन में बचा हुआ काम करने चली गई । उतने में काम वाली बाई भी आ गई । घर के सारे काम निपट जाने के बाद, बाई की मदद से पलक ने घर की दूसरी चीजों को भी ठीक ठाक कर लिया। पर्दे, बेडशीट सब बदल दिए । शाम को आने वाले स्पेशल मेहमान के लिए घर को सेट भी तो करना था। आज वक़्त की रफ़्तार थोड़ी तेज़ लग रही थी। चीजों को अर्रंज करते करते दोपहर कैसे हो गई पता ही नहीं चला। पलक का काम में हाथ बटाते-बटाते आज बाई को भी थोड़ी देर हो गई। पर दोपहर तक पूरा काम निपट ही गया।
पलक और सुमेद मुबई के एक रिहायशी इलाके में, बेहद खुबसूरत थ्री बेडरूम के फ्लैट में रहा करते थे। दो लोगो के हिस्साब से फ्लैट काफी बड़ा था। जिसके रख रखाव में ही पलक का पूरा दिन निकल जाया करत था। वैसे घर का काम करने के लिए कामवाली बाई तो थी पर घर को सवार के रखने के लिए पलक खुद ही हर चीज़ पर ध्यान दिया करती थी। घर मेंटेन रखने को लेकर काफी एक्टिव थी पलक। अपने घर का पूरा इंटीरियर पलक ने खुद किया था। एक एक सामान, शोपिस, दीवारों के कलर से लेकर कर्टेन तक, सब पलक की ही चॉइस थी। घर बेहद आलीशान था, बिलकुल रॉयल लुक देता था। घर पर आने वाला हर एक व्यक्ति, घर की तारीफ किए बिना, रह नहीं पाता था। । पलक और सुमेद के पास, मुंबई जैसे इतने महंगे शहर में खुद का फ्लैट था और दो कार थी। एक तो उनकी खुद की और दूसरी कार सुमेद को कंपनी के काम के लिए कंपनी की तरफ से दी गई थी।
सुमेद एक वेदेशी कंपनी में काम करता था। जिनकी ब्रांच मुंबई के साथ साथ और भी कई शहेरो में थी। मुंबई की ब्रांच का पूरा काम सुमेद के अंडर में था। सुमेद इस ब्रांच में जनरल मेनेजर की पोस्ट पर था। पोस्ट बड़ी थी तो जिम्मेदारी भी बड़ी थी। जिस वजह से सैलरी भी काफी अच्छी थी। बेहद चकाचौन्द से भरी ज़िन्दगी थी दोनों की। पर पलक इस माहोल में अपने आप को कम्फर्टटेबल महसूस नहीं किया करती थी। पार्टी और ऐसी ही दूसरी सोशल गैदरिंग में जाना आना, ज्यादा पसंद नहीं था पलक को। वो तो सिर्फ सुमेद का दिल रखने के लिए चली जाया करती थी। सुमेद को अपनी प्रोफेशनल लाइफ की वजह से, सोसाइटी में अपना स्टेटस मेंटेन रखना पड़ता था। सोसाइटी में जुड़ कर रहना पड़ता था। जिस वजह से, मन ना करते हुए भी, उसे पार्टिया में जाना आना पड़ता था। वैसे उसे भी ये पार्टिया कुछ खास पसंद नहीं आया करती थी। पर ना चाहते हुए भी, उसे क्लाइंट और बिज़नेस कलीग की वजह से पार्टी में जाना ही पड़ता था। वरना सुमेद और पलक दोनों ही सादगी पसंद थे। ज्यादा शोर शराबा, लोगो के बिच दिखावा करना, दोनों को ही पसंद नहीं था। भले ही किस्मत ने दोनों को हर एक चीज़ से नवाज़ा था। दुनियावी हर सहलाते मौजूद थी उसके पास । पर दोनों तक़दीर के खेल को जानते थे। जिस वजह, सब कुछ होने के बावजूद भी, दोनों अपने पैर ज़मीन से उठाने नहीं देते थे।
दोपहर हो चुकी थी, सुमेद को ऑफिस से आने में अभी टाइम था। सुबह से काम करते-करते, पलक को थकावट महसूस हो रही थी। खाना खाने के बाद, पलक ने थोड़ी देर आराम करना बेहतर समझा। ताकि शाम के समय वो फ्रेश महसूस कर सके। वैसे आज पलक के लिए आराम करना थोडा मुस्किल था, शाम में आने वाले मेहमान से मिलने का रोमांच, उसे नींद कहा आने देने वाला था। पर जैसे तैसे थोड़ी देर आराम करने के बाद, पलक की नींद खुल गई। समय देखा तो अभी भी काफी वक़्त था सुमेद को आने में। पलक ने कॉफ़ी बनाया और हॉल में सोफे पे आ कर बैठ गई। पलक के घर की हॉल की विंडो, पूरी दिवार जितनी बड़ी थी और ऊपर से फ्लैट ७ फ्लोर पे होने की वजह से पुरे इलाके और हाईवे का दृश्य बेहद मोहक और खुबसूरत नज़र आया करता था। कॉफ़ी की चुस्की लेटे लेटे, वही सोफे पे बैठे, विंडो से लोगो को आते जाते देख, पलक अपनी पुरानी यादो में खो गई।
पलक एक सामान्य परिवार में पैदा हुई एक खामोश मिजाज़ की लड़की थी। लोगो से कम बात करना और अपने काम से मतलब रखने में यकीन रखती थी। पढाई में होसियार और अपने माता पिता की बेहद लाडली थी पलक। बचपन में तो वो बेहद चुबुले और नटखट स्वभाव की थी। शरारत से भरी , इधर से उधर पुरे घर में दौड़ भाग करती ही रहती, एक जगह पैर न टिकते थे उसके। पलक दिखने में माध्यम कद कटी की, सवाले रंग वाली, दुबली पतली लड़की थी। उसके सवाले रंग से उसके परिवार को तो कोई फर्क नहीं पढ़ता था पर दुसरे नाते-रिश्तेदार, पडोसी उसके रंग को लेकर कोई ना कोई तंज कस दिया करते थे। उसके पिता तो कुछ नहीं कहते, लेकिन पलक को लेकर की गई टिपणी से उसकी माँ बिगड़ जाया करती थी। और आखिर बिगड़े भी क्यों ना, हर माँ बाप के लिए उनके बच्चे उन्हें सब से अज़ीज़ और प्यारे जो होते है।
पलक का एक छोटा भाई भी था, मुकेश। पलक उसके साथ ही खेलती और अपनी हर बात शेयर भी किया करती थी। पलक की कुछ सहेलिय भी थी, पर वो दोस्तों के साथ ज्यादा समय न बिताते हुए, अपनी पढाई को ज्यादा इम्पोर्टेंस दिया करती थी। उसने अपना सारा ध्यान पढाई में एकत्रित कर लिया था। सहेलियों के साथ खेलना-घूमना उसे उतना अच्छा नहीं लगता था । जितना उसे नई चीजों के बारे में जानने और पड़ने में लगता था। पढाई में उसकी मदद उसके पिता किया करते थे। जो एक सरकारी कंपनी के बाबु थे। पलक पढाई में इतनी अच्छी थी, की उसे कभी तिउशन की भी ज़रूरत नहीं पढ़ती थी। पढाई में जो मदद लगती वो उसके पिता और स्कूल के टीचर से उसे मिल जाया करती थी। वक़्त बितता रहा और पलक ने अपनी स्कूल की पढाई पूरी कर, कॉलेज में इंजीनियरिंग की डिग्री के लिए एनरोल कर लिया।
इंजीनियरिंग में एडमिशन के बाद पढाई में उसका रुझान और बड गया। कॉलेज के दौरान, पलक ने कई प्रोजेक्ट बनाए, जिनकी वजह से यूनिवर्सिटी में उसका काफी नाम हो गया। उसे कई अवार्ड से नवाज़ा भी गया। अपनी काबिलियत से पलक अपना और अपने माँ पिता का नाम भी खूब रोशन कर रही थी। धीरे धीरे समय बीतने लग, पलक की पढाई अब पूरी होने लगी थी। पलक की उम्र बडने के साथ साथ, उसकी शादी को लेकर, उसके माता पिता की चिंता भी बडने लगी थी। आज जहा कुछ घटिया मानसिकता वाले लोग समाज में शादी के लिए रूप रंग और पैसो से रिश्ते को आकते और तौलते है। ऐसे लोग के लिए गरीबी और शारीरिक बनावट में सावला रंग किसी श्राप से कम नहीं। ऐसे ही मानसिकता वाले लोगो को तो पलक और उसके माता पिता बरसो से झेल रहे थे। लोग मन की सुन्दरता को अनदेखा कर चहेरे की सुन्दरता पर ज्यादा तवज्जो देते है। यही पलक के साथ भी हो रहा था। वैसे समाज में ऐसो लोगो की कमी नहीं है। जो लोगो में नुक्ता चीनी कर, उनकी अच्छाईयों को नज़रंदाज़ कर, कोई न कोई कमी को ढूढने में लगे रहेते है। सोचा जाये तो, इन लोगो की मानसिक हालत ख़राब होती है। तभी तो अपने आप को श्रेष्ट समझे और बताने के चक्कर मे उन्हें कब क्या बोलना है और किससे और कहा कितना मजाक करना है समझ नहीं आता। इन्हें, इनकी बातो और मजाक से किसी को कितनी तकलीफ होती है, इस का ख्याल तक नहीं रहता। लोगो की इन हरकतों से, किसी किसी की ज़िन्दगी पे तो इसका काफी बुरा असर तक पड़ता है।
शादी को लेकर, लोगो द्वारा सवाले रंग की वजह से बार बार मना कर देने के कारण धीरे धीरे पलक की दिमाग पर गहेरा असर होने लगा था। वो निराश रहेने लगी। उसने लोगो से मिलना झुलना कम कर दिया। कोई घर आता तो कमरे मे चले जाया करती। लोगो को अवॉयड करना शुरू कर दिया था पलक ने। पलक की शादी के लिए उसके माता पिता परेशान रहने लगे। रिश्ते के लिए उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। लोग पलक का रंग देख रहे थे, उसके गुण नहीं। उसकी उपरी दिखावट से उसे आंक रहे थे, मन की सुन्दरता से नहीं। लोगो की घटिया मानसिकता से पलक को अब चिड होने लगी थी। कुछ लोग रिश्ते के लिए मान भी जाते तो, दहेज़ की मांग कर देते, जो पलक के पिता द्वारा पूरा कर पाना मुस्किल होता। कुछ रिस्तो में तो दहेज़ की मांग हैसियत से ज्यादा होने के बावजूद भी, पलक के पिता मान जाते, लेकिन पलक ऐसे रिस्तो को लिए खुद, आगे से, मना कर दिया करती। उसके हिसाब से जिन रिस्तो की नीव पैसो की बुनियाद पर राखी गई हो, वो कभी भी ढहे सकते है। ऐसे रिश्ते में एक दुसरे के लिए इज्ज़त और सम्मान की वजह सिर्फ और सिर्फ पैसे होता है। जब पैस ख़त्म, रिस्तो मे इज्ज़त और सम्मान भी ख़त्म हो जाता है।
पलक ने घर पर, युही खाली बैठने से बेहतर जॉब करना तैय किया। जिसके लिए उसके माता पिता ने भी पूरी सहमति जताई। उसने कुछ कंपनी में अप्लाई किया और उसे अच्छा ऑफर मिल गया । पलक अब किसी पर निर्भर नहीं रहना चाहती थी। अपने पैरो पे खड़े हो, वो इस समाज में अपना एक अलग मुकान बनाना चाहती थी। जहा लोग उसे उसके रंग से नहीं बल्कि उसकी काबिलियत की वजह से उसे पहचाने। पलक ने तैय किया की वो तभी शादी करेगी, जब कोई लड़का बिना कोई शर्त और दहेज़ के उससे शादी करने को तैयार हो । उधर पलक के छोटा भाई महेश की उम्र भी बढने लगी थी। महेश ने अपनी पढाई एम.बी.ए में पूरी की थी। पढाई में वो भी होसियार था, तो कॉलेज से ही कैम्पस सिलेक्शन द्वारा उसका एक अच्छी कंपनी में सिलेक्शन हो गया । सब कुछ ठीक ही चल रहा था। एकाएक पलक के पिता बीमार रहेने लगे। बीमारी के साथ साथ बेटी की शादी की फिकर ने उन्हें पूरी तरह तोडा दिया था। महेश जिस कंपनी में काम करता था, वही उसके साथ काम करने वाली एक लड़की से, महेश का अफेयर हो गया। धीरे धीरे बात इतनी आगे बड़ी की दोनों ने शादी करने का मन बना लिया। जो की महेश की उम्र भी कुछ ज्यादा नहीं थी और उसकी बड़ी बहेन, पलक की शादी अभी होने की थी। तो महेश के पिता, उसकी बड़ी बहेन से पहेले उसकी शादी करने के खिलाफ थे। उन्होंने महेश की पसंद और रिश्ते से सहमती तो जताई पर उसे थोडा रुकने की साला दी। पर महेश पे तो जैसे प्यार का भूत सवार था। अब उसने कहा किसी की सुनना था। घर में तनाव रहेने लगा। कोई न कोई छोटी सी छोटी बात पर महेश उखड जाया करता। जिस वहा से उसके और उसके पिता के बिच कभी कभी उची आवाज़ में बात भी होने लगी। घर का माहोल बिगड़ता देख, समझदारी दिखाते हुए, पलक ने अपने माता पिता को महेश की शादी के लिए मनवालिया।
ना चाहते हुए भी, अपनी बेटी की बात मान, पलक के पिता ने महेश की शादी के लिए इजाज़त दे दी। लड़की वालो से बात कर महेश का रिश्ता तैय कर, उसकी शादी करवा दी गई। शादी के दुसरे दिन से ही महेश की बीवी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया। अपनी नौकरी का दोस दिखाते हुए, उसने घर के रोज़मर्रा के काम में हाथ बटाने से साफ़ मना कर दिया। हर बात में घरवालो को अकड़ दिखाया करती। जिससे रोज़ कोई न कोई बात को लेकर पलक की माँ और महेश की बीवी में कहा-सुनी हो जाया करती। महेश भी चार दिन की शादी और अपनी बीबी की गुलामी में इतना दीवाना हो चूका था की अब उसके दिल में खून के रिस्तो की अहेमियत बिलकुल ना के बराबर बची थी। इन्ही सब टेंशन और अपनी बीमारी के कारण पलक के पिता एक दिन अच्चानक इस दुनिया से चल बसे। पलक और उसकी माँ का रो रो कर हाल बुरा था। महेश को भी अपने पिता के जाने का गम था। अगर इन सब से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता था तो वो थी महेश की बीवी। जिसके चेहरे पे दुःख की एक जलक तक नहीं थी। घर के मुखिया के चले जाने के गम के बदले। उसे महेश के पिता की पेंशन बंद हो जाने की चिंता और घर की ज़िम्मेदारी अपने पति पर आ जाने का गम ज्यादा था। वैसे भी पलक और उसकी माँ अब भी महेश पे निर्भर नहीं थी । पलक खुद कमानी थी और पलक की माँ को अपने पति की मौत के बाद उनकी पेंशन मिलनी थी।
इस ही दौरान महेश को कंपनी की तरफ से विदेश में जॉब का ऑफर मिल गया। अपनी बहेन और माँ के बारे में बिना कुछ सोच-विचार किया, की उसके बाद यहाँ उसके पीछे उनका क्या होगा और वो लोग अकेले अपनी ज़िन्दगी कैसे बसर करेगे, महेश ने विदेश जाने वाला ऑफर को एक्सेप्ट कर लिया। कंपनी से मिले हुए ऑफर से महेश की बीवी को काफी खुश थी क्युकी महेश अपने साथ अपनी बीवी को भी ले जा रहा था। वैसे भी महेश की बीवी हमेश से ही, महेश की माँ और उसकी बहेन से अपना पीछा छुड़ाने की फ़िराक में लगी ही रहती थी। ये मौका वो हाथ से जाने नहीं देना चाहती थी। लेकिन महेश के इस फैसले से उसकी माँ बिलकुल टूट सी गई। पलक अब तब अपने भाई को समझ चुकी थी, जिस वजह से वो उसके इस फैसले से बिलकुल भी अचंबित नहीं थी। अपनी बहेन और माँ को बिलकुल अकेला छोड़, महेश अपनी बीवी के साथ अपनी नई नौकरी के लिए चल पड़ा। अपनी नज़र के सामने, ताशा के पत्तो की तरह अपन घर बिखरता देख, पलक की माँ सदमे में चली गई। घर की ज़िम्मेदारी अब पलक पर थी। विदेश जाने के बाद महेश ने कभी भी फ़ोन कर अपने परिवार की कोई खोज खबर नहीं लि। इस मुस्किल वक़्त में पलक अपनी माँ के साथ बराबर बनी रही। अपना बेटी होना का फ़र्ज़ निभाती रही। दिन पे दिन, पलक की माँ की तबियत सुधरने के बजाये बिगड़ती ही जा रही थी। पलक ने इलाज़ में कोई कमी न होने दी। अपनी ज़िन्दगी के आखिरी बचे खून के रिश्ते को बचाने में उसने अपनी पूरी ताकत लगा दी। पर पति की मृतु और बेटे के छोड़ के चले जाने के गम से वो उभर ही नहीं पा रही थी। अक्सर नींद में महेश का नाम लेती रहती। महेश के विदेश चले जाने के कुछ ही महीनो बाद, पलक को अकेला छोड़, उसकी माँ भी चल बसी ।
इस दुःख की घडी में पलक को उसकी दोस्त अंजू ने संभाला। अंजू और पलक एक ही कंपनी में काम किया करते थे। एक ही प्रोजेक्ट पर साथ थे तो अच्छी दोस्ती हो गई। पलक उसे अक्सर अपने घर के हालत के बारे में बताती रहती। दोस्ती नई थी, पर गिरगिट की तरह रंग बदलते हुए खून के रिस्तो से बेहतर थी। पलक की माँ की खबर मिलते ही, अंजू फ़ौरन उसके पास जा पहुची। अंजू ने पलक को इस मुस्किल दौर में सहारा दिया। उस ने पलक को कुछ दिनों के लिए उसके साथ, उसके घर चल रहेने को मना लिया था। पलक को भी इस मुस्किल दौर में किसी के साथ की ज़रूरत थी। अंजू अपने माता पिता और एक छोटी बहेन के साथ रहा करती थी । अंजू के माता पिता ने अंजू के इस फैसले का सवगत किया और पलक के इस बुरे वक़्त में उसे अपना पूरा सपोर्ट दिया। कुछ दिनों तक तो पलक सदमे,में, रही। अंजू और उसके परिवार के लोग पलक को एक मिनट के लिए भी अकेला नहीं चदते थे। उससे इधर उधर की बात कर, समय समय पे होसला और दिलासा दे, उसे इस सदमे से निकलने में पूरी मदद कर रहे थे। कुछ दिन बीत जाने के बाद, पलक ने अपने आप को इस गम से उभार ही लिया। वो अब ज़िन्दगी में आगे बड़ने को तैयार थी। उसने वापस अपने घर जाने का फैसला किया। जिस पर अंजू और उसके माता पिता ने उसे, कुछ दिन और उनके साथ रहेने को कहा। लेकिन पलक अब अकेले रहने की आदत डालना चाहती था और आपने आप को इस ज़िन्दगी के मुताबिक बनाना चाहती था, जिस वजह से अपने घर वापस जाना ही पलक ने बेहतर समझा। वैसे भी, एक ना एक दिन उसे अंजू के घर से जाना ही था । इस नये रिश्ते को हमेशा बरकारा रखने, अंजू के परिवार द्वारा मिले हुए सपोर्ट और प्यार को कभी न भूलने और समय समय पे मिलते रहेने की बात कर, पलक वापस अपने घर लौट आई।
घर और ज़िन्दगी का अकेलापन उसे कटाने को दौड़ता था। इस लिए ज़्यादातर पलक अपने आप को ऑफिस या घर के काम में व्यस्त रखती। पलक, ऑफिस की छुट्टी के दिन अक्सर अंजू के घर चली जाया करती। अक्सर अपने साथ समय बिताने और खाने के लिए भी अंजू का परिवार उसे घर बुला लिया करता। पलक को उन लोगों का साथ अच्छा लगने लगा था। इतने बड़े शहर में, अब अपना कहेने के लिए उसके पास अंजू जैसी दोस्त और उसका परिवार था। जो उससे बिलकुल अपने परिवार के सदस्य जैसा ही बर्ताव करते। रोजाना सुबह तैयार हो, वो ऑफिस के लिए समय से पहेले ही निकल जाया करती। ऑफिस के रस्ते में एक पार्क था। जहा रुक वो रोज़ थोडा समय बिताया करती। यहा पार्क में लोगो की भीड़-भाड़ उसे घर के खालीपन से बेहतर लगा करती थी। भले ही वो यहाँ किसी से बात नहीं करती, लेकिन अपने आस पास बच्चो को खेलता देखा, लोगो को आता जाता देख उसे अच्छा लगा करता।
एक बार अंजू के मौसी का बेटा सुमेद, अपने ऑफिस के काम के सिलसिले में अंजू के घर आया था। उस ही शहर में उसका कांफ्रेंस था। ऑफिस का काम भी हो जाता और सथोसाथ परिवार से मिलना भी। सुमेद और अंजू की काफी अच्छी जमती थी। बचपन से दोनों एक दुसरे को भाई-बहेन कम, दोस्त जैसा ज्यादा ट्रीट किया करते थे। उम्र बडने के साथ साथ दोनों की बोन्डिंग और अच्छी हो गई, दोस्ती और भी गहेरी हो गई। इतनी गहेरी की दोनों एक दुसरे से कोई सीक्रेट नहीं रखते, छोटी से छोटी, हर बात शेयर किया करते थे। चाहे बात पर्सनल हो या प्रोफेशनल। सुमेद के कांफ्रेंस को अभी टाइम था। वो कुछ दिन पहेले ही अंजू और उसके परिवार के साथ समय बिताने आ गया था, मीटिंग चार दिन बाद थी। । सुमेद के आने के मौके पर अंजू ने, उसके घर आने वाले दिन, पूरी फॅमिली के साथ खाना खाने के लिए होटल जाने का प्लान बनाया। इस प्लान में उसने पलक को भी शामिल कर लिए। अबतक पलक उनके हर ख़ुशी के मौके पर उनके साथ मौजूद रहा करती थी, इसलिए पार्टी के लिए उसने पलक को भी इनविटे किया। सुमेद अपने समय मताबिक घर पहुच गया। पार्टी के लिए पलक और अंजू ऑफिस के बाद वही से सीधा अंजू के घर पहुच गए। घर के दरवाज़े पर पहुच, बेल बजाने पर सुमेद ने ही दरवाज़ा खोला। अंजू और पलक के घर में आते ही, अंजू ने पलक को सुमेद से परिचय कराया । पलक तो सुमेद से अनजान थी। अंजू ने कभी सुमेद के बारे में आज से पहेले उससे बात नहीं की थी और ना ही कभी उसे बात बातो में कुछ सुमेद के बारे बताया था। वैसे अंजू को, सुमेद के बारे में बताने का कभी कोई मौका भी नहीं पढ़ा। लेकिन सुमेद पलक के बारे में सब जनता था। अंजू, सुमेद को पलक के बारे में सब बता चुकी थी। भले ही सुमेद पलक से कभी मिला नहीं था। लेकिन अंजू द्वारा उसके साथ जीवन में घटी हर एक चीज़ की जानकारी होने की वजह से, बिना मिले ही उसके दिल में पलक के लिए कही न कही एक सॉफ्ट कार्नर बन चूका था।
पलक जरा शर्मीली और इंट्रोवर्ट किस्म की लड़की थी। पहली मुलाकात में सुमेद के साथ उसने ज्यादा बात नहीं की। सुमेद भी जितना और जब ज़रूरी होता उतना ही बात कर रहा था। पर शाम होते होते दोनों एक दुसरे से बात करने लगे थे। सुमेद के अंजू के घर रहेते हुए, उसके कांफ्रेंस के पहले के, ये चार दिन, सबका साथ बहार जाने का कोई न कोई प्लान, बन ही जाया करता। जिसमें पलक भी हमेश शामिल रहा करती। इन चार दिनों में पलक और सुमेद की एक दुसरे से काफी बातचीत होने लगी थी। बातो बातो में दोनों ने एक दुसरे को अपने बारे में सब बता दिया था। दोनों एक दुसरे से, बात करने और हसी मजाक करने में, अब कम्फर्ट टेबल हो चुके थे । अंजू को छोड़ सुमेद तो अब,ज्यादातर पलक से ही बात किया करता।
कांफ्रेंस के बाद सुमेद वापस अपने घर लौट गया। लेकिन अबतक उसकी दोस्ती पलक से हो चुकी थी। घर लौटने के बाद, कभी कभी फ़ोन पर अंजू से बात करते वक़्त, पलक के मौजूद होने पे, सुमेद और पलक की भी बात हो जाया करती। घर वापस आने के कुछ दिनों के बाद, ऐसे ही बातो-बातो में पलक से बात करने के लिए सुमेद ने अंजू से पलक का फ़ोन नंबर ले लिए। अंजू के पूछने पर, सुमेद ने, ऐसे ही कभी कभी कॉल कर बात करने की बात कही। क्युकी अंजू के घर रहते हुए, पलक से सुमेद की काफी अच्छी दोस्ती हो गई थी। फ़िलहाल तो सुमेद के लिए पलक उसकी बहेन की दोस्त थी और पलक के लिए सुमेद अंजू का भाई। शुरुवाती दिनों में तो दोनों की बाते बिलकुल नार्मल और एक दुसरे की खबर लेने के लिए हुआ करती। पर धीरे धीरे सुमेद के दिल में पलक को लेकर एक अलग ही जज्बात उभरने लगे थे। वो अब पलक को पसंद करने लगा था। पलक के साथ उसकी ज़िन्दगी में घटे बुरे दौर और पलक का उससे उभारना भी कही न कही, सुमेद को उसके तरफ आकर्षित कर रहा था। यहाँ पलक का भी हाल बिलकुल सुमेद की तरह ही था। मोहब्बत के इज़हार की पहेल सुमेद ने की और उसे मान पलक ने भी अपनी मोहर लगा दी। शुरू शुरू में तो दोनों ने अंजू से अपनी मोहब्बत की बात को छुपाया। लेकिन अक्सर सुमेद का पलक को ऑफिस में भी फ़ोन कर देने को देख, अंजू को कुछ दाल में काला लगा। पलक से पूछने पर, वो तो बात को काट दिया करती पर अंजू से रहा नहीं गया और एक दिन सुमेद से बातो बातो में, पलक और उसके बिच में पक रही खिचड़ी के बारे में पूछ ही लिया। ज़ोकी सुमेद अंजू से कभी कोई बात छुपता नहीं था। इसलिए लिए उसने अंजू को अपनी मोहब्बत की पूरी दास्तान बाया कर दी। अंजू को दोनों के रिश्ते से कोई तकलीफ नहीं थी। उल्टा वो, तो इस रिश्ते को लेकर उन दोनों से ज्यादा एक्साइटेड थी।
दुसरे दिन जब ऑफिस में अंजू ने पलक से इस बारे में बात की तो, पलक ने भी उसे सब सच बता दिया। पलक ने अंजू से इस बारे में उसकी राय पूछी। जिस पर अंजू ने अपनी पूरी सहमती और ज़रूरत पड़ने पे पूरा साथ देने की बात भी कही। अब ऑफिस के काम, या अंजू और उसके परिवार से मिलने के लिए, सुमेद अक्सर अंजू के घर आ जाया करता। ऑफिस का काम और अंजू और उसके परिवार से मिलना तो केवल बहाना हुआ करता। उसका असली मकसद तो पलक से मिलना, उसके साथ समय बिताना हुआ करता था। ताकि दोनों एक दुसरे को और समझ सके और जान सके। सुमेद अब पलक को लेकर सीरियस होने लगा था और जल्द से जल्द पलक से शादी कर अपना घर बसाना चाहता था। पलक से उसका जवाब पूछने पर पलक भी सुमेद से शादी के लिए तैयार थी।
अंजू के दिल में कही न कही इस रिश्ते को लेकर डर था। भले ही सुमेद इस बात को नज़रंदाज़ कर रहा हो, लेकिन अंजू इस बात को जानती थी की सुमेद और पलक के रिश्ते के लिए उसकी मौसी और मौसा जी , मतलब सुमेद के माता पिता कभी नहीं मानेगे, क्युकी सुमेद की शादी और उसकी दुल्हन को लेकर उनके सपने कुछ अलग ही थे। एक दिन अंजू को अपनी माँ से, सुमेद के लिए उसके घरवालो द्वारा लड़की देखने की बात पता चली। अंजू ने सुमेद को इस बारे में सचेत किया और जल्द से जल्द अपने माता पिता से पलक के बारे में बात करने को कहा। पलक के बारे में बताने से पहेले ही सुमेद जनता था की उसके माता पिता इस रिश्ते के लिए कभी नहीं मानेगे, क्युकी सुमेद के लिए दुल्हन का चयन उसके घर वाले भी दुसरे लोगो की तरह लड़की की उपरी सुन्दरता को देखते हुए कर रहा थे, न की मन की सुन्दरता को। सुमेद जनता था की उसको पलक से बेहतर जीवन संगनी और उसके माँ पिता को पलक से बेहतर बहु कभी नहीं मिलेगी। जो उसके और उसके परिवार दोनों के लिए बिलकुल सटीक थी। एक दिन मौका देख सुमेद ने अपने घरवालो को पलक के बारे में बता ही दिया। जिस पर उसके घर वाले पहेले तो थोडा खामोश रहे, लेकिन सुमेद से पलक की खूबिया और उसके बारे में जान खुश हो गए। सुमेद से पता चलने पर की अंजू पलक की दोस्त है और पलक हमेश उनके घर आती जाती है। तो सुमेद के घर वाले पलक को लेकर थोडा और इत्मीनान हो गए । लेकिन अभी तक सुमेद के घर वालो ने कभी पलक को देखा नहीं था। थोडा बहुत अंजू के माँ के ज़रिये सुमेद की माँ पलक के बारे में जानती थी।
सुमेद के घर वालो ने उससे पलक की फोटो दिखाने की बात की, ताकी वो लोग भी सुमेद की पसंद अपनी होने वाली बहु को देख सके। फोटो देखते ही सुमेद के माता पिता का चेहरा उतर गया। उन्होंने जिस तरह की बहु की सोच रखी थी, पलक वैसी बिलकुल नहीं दिखती थी। सुमेद के दोनों भाई और बहेन का रिएक्शन भी ठीक नहीं था। कुछ पल पहेले घर का जो माहोल खुशनुमा और हसी मजाक का चल रहा था, वो एक दम से शांत हो गया। सुमेद की माँ ने फोटो देखने के फ़ौरन बाद, शादी के लिए मना कर दिया। सुमेद के पिता ने भी अपनी पत्नी की हा में हा मिलते हुए, रिश्ते के लिए इंकार कर दिया। सुमेद के वजह पूछने पे, दोनों ने कुछ कहेने से परहेज़ किया और उठ कर अपने कमरे में चले गए। सुमेद ने अपने माता पिता को समझाने की बहुत कोशिश की, पर वो अपने फैसले पे अड़े रहे।
सुमेद की माँ ने अपने बेटे सुमेद और पलक की नजदीक का पूरा ज़िम्मेदार अंजू को ठराया और फ़ोन कर उसे खूब खरी खोटी सुनाई। उसने अपनी बहेन, अंजू की माँ को भी सारी बाते बता दी और अंजू को बोल पलक को सुमेद से दूर रहेने को भी कह दिया। पलक और सुमेद के बारे में जान अंजू का परिवार बिलकुल भौचक्का रह गया। उन्हें इन सब बात की बिलकुल भी खबर नहीं थी। अंजू की माँ पलक को बहुत अच्छी तरह जानती थी। पलक का स्वभाव, से लेकर उसका तौर तरीका, जो उन्हें काफी पसंद था। अंजू की माँ, पलक को बिलकुल अंजू की तरह ही मानती थी। लेकिन इन सब बात से वो भी थोडा कही न कही आहात हो चुकी थी। अंजू के ऑफिस से घर लौटने पर उसने उससे सारी बात पूछी। सुमेद ने पहले ही घर के हालत अंजू को बता दिया था और इस मामले में उसकी मदद करने की बात भी कही थी। अपनी माँ के पूछने पे अंजू ने उन्हें सब सच-सच बता दिया। पलक इन सब बातो से अनजान थी। सुमेद और अंजू ने पलक को अभी तक घर के हालत नहीं बताए थे। वो लोग उसे परेशान नहीं करना चाहते थे। सुमेद और अंजू को कुछ समझ नहीं आ रहा था की क्या करे, सुमेद ने अपने माता पिता को समझाने की बहुत कोशिश की पर दोनों में से कोई भी उसकी बात सुनने को तैयार ही नहीं था। उल्टा वो ही उसे समझाने लगते की पलक को भूल जाये, वो लोग उसके लिए उससे अच्छी और बेहतर लड़की ढूंढेगे।
कुछ दिन ऐसे ही बीत गए, सुमेद के घर का माहोल दिन पे दिन बिगड़ता ही जा रहा था। सब अपनी अपनी जगह अड़े हुए थे। अपनी बात न पूरी होती देख सुमेद ने सब से बात करनी भी बंद कर दी थी। सुमेद की माँ ने अपनी बातो से अंजू के परिवार को भी पलक के खिलाफ कर दिया था। अब तो अंजू के माता पिता भी सुमेद और पलक के रिश्ते से नज़र थे। सुमेद और अंजू को छोड़ पुरे परिवार एक तरफ हो चूका था। अंजू की माँ ने अपनी बहेन की बातो में आ, पलक को फ़ोन कर, उसके और सुमेद के रिश्ते को लेकर खूब खरी खोटी सुनाई। एक वक़्त था, जब अंजू की माँ पलक और अपने बच्चो में बिलकुल भी फर्क नहीं समझती थी। आज वही, अंजू और पलक की दोस्त को भी पसंद नहीं कर रही थी। अंजू की माँ की बात से पलक को सुमेद और अंजू के घर में उसको लेकर हो रहे कलेश के बारे में पता चला। अंजू की माँ ने पलक से सुमेद और अंजू दोनों से दूर रहेने को कह दिया और उनके किये हुए एहसानों को इस तरह से चुकाने की बात कर अपनी नज़राजी भी जताई। अंजू की माँ ने उसे अपने घर, कभी न आने को कहे, सुमेद से दूर रहने को चेताया। अंजू की माँ की बात सुन, पलक के कदमो के निचे की ज़मीन खिसक सी गई। जिन लोगो को वो अपना सब कुछ मानती थी, वही लोग उससे, अपना रिश्ता तोड़ रहे थे। इन सब बातो से पलक बिलकुल टूट सी गई।
पलक ने सुमेद को फ़ोन लगा, उससे अपना नाता-रिश्ता सब तोड़ दिया, क्युकी वो अंजू के परिवार के एहसानों को भूल नहीं सकती थी और उसकी वजह से उन्हें कोई तकलीफ हो, ये भी वो बर्दास्त नहीं कर सकती थी। पलक ने सुमेद को उसे भूल जाने, दुबारा कभी न मिलने और फ़ोन तक ना करने की बात कर रोते रोते फ़ोन काट दिया। सुमेद को अपना जवाब देने और बात समझाने का मौका तक नहीं दिया पलक ने। आज पलक अपने आप को बिलकुल अकेला महसूस कर रही थी। अपने आप को पुरे संसार में तन्हा देख रही थी। आज उसके पास न कोई उसे समझाने वाला था और ना ही कोई उसे समझने वाला। पलक का फ़ोन कट होते ही, सुमेद ने फ़ौरन अंजू को फ़ोन कर सारी बात बता दी और जल्द से जल्द पलक से मिल उसे समझाने को कहा। सुमेद की बातो से अंजू समझ चुकी थी कि पलक क्या महसूस कर रही होगी। अपने घरवालो को बाज़ार से सामान खरीदने का बहाना कर, अंजू तुरंत पलक के घर जा पहुची। जहा पलक की हालत देख वो बेहद उदास हो गई। घर का दरवाज़ा खुला था और पलक हॉल के कोने में बैठी रो रही थी। पलक के पास जा उसे गले लगा अंजू, उसे अपने आप को सँभालने को कहे, दिलासा देने लगी। पलक रोते रोते, अंजू से सुमेद को उसे भूल जाने को कहे, उसे भी उससे दुबारा कभी न बात करने और मिलने को कहेने लगी।
अंजू ने जैसे तैसे कर पलक को शांत किया। उसे सुबह ठन्डे दिमाग से दुबारा सोच विचार कर फैसला लेने को कहा। अंजू ने पलक को, हमेश, हर घडी, हर कदम उसके हर फैसले में उसका साथ निभाने को कहे, पलक को आराम करने को कहे, अपने घर चली गई। घर जा अंजू ने सुमेद को पलक की बात और हालत बता, कल सुबह कुछ तैय करने का निर्णय लिया। सुमेद, पलक और अंजू के लिए आज रात काफी लम्बी थी। इस बिच सुमेद ने पलक को कई बार कॉल लगाया पर पलक ने एक बार भी उसका कॉल नहीं उठाया।
सुबह उठते ही ऑफिस की तैयारी कर अंजू ऑफिस के लिए निकल पड़ी। ताकी पलक और सुमेद से बात कर, इस मुस्किल वक़्त का जल्द से जल्द कुछ फैसला कर सके। ऑफिस पहुच उसे पता चला की आज पलक ऑफिस नहीं आई है। उसे पलक की फ़िक्र होने लगी। वह भी ऑफिस से छुट्टी ले, सीधा पलक के घर जा पहुची। अंजू ने दरवाज़ा खटखटाया, जीस पर पलक ने अन्दर से, दरवाज़े पर कौन है, कर के पूछा। अंजू के जवाब देने पे पलक ने उसे वापस चले जाने को कहे दिया। अंजू ने पलक को खूब समझाया और अपनी दोस्ती का वास्ता दिया। तब जा के पलक ने बड़ी मुस्किल से दरवाज़ा खोला। दरवाज़ा खोलते ही पलक ने अंजू से सुमेद को लेकर बात करने से साफ़ मन कर दिया। अंजू के बहुत समझाने और सुमेद के प्यार की दुहाई देने पर पलक बात करने को मान गई। पर उसने सुमेद से बात करने से साफ़ मना कर दिया। अंजू ने सुमेद को पलक के घर से ही कॉल लगाया और फ़ोन को स्पीकर पे कर दिया, ताकी सुमेद पलक से बात कर सके। सुमेद ने पलक को अपने प्यार की खूब दुहाई दी और इस तरह उसे बिच मजधार में उसका साथ ना छोड़ने को कहे, फुट फुट कर रोने लगा। फ़ोन पर सुमेद की बात सुन और सुमेद के. उसके लिए जस्बात जान, पलक भी अब थोडा शांत होने लगी थी। जो की वो भी उसे उतना ही प्यार करती थी, इसलिए अपने प्यार और जस्बात को वो जितना भी छुपा लेते, लेकिन सुमेद से दूर रहना पलक के लिए भी आसान नहीं होता। सुमेद और अंजू दोनों के खूब समझाने पर पलक मान गई।
अपने परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ जा कर, सुमेद ने पलक से शादी करने का फैसला कर लिया। परिवार की मर्ज़ी के खिलाफ जा कर शादी करने के सुमेद के फैसले से पहेल तो पलक ने नाराज़गी जताई। लेकिन अंजू और सुमेद के समझाने पर, और कोई रास्ता ना होने पर, ना चाहते हुए भी पलक को सुमेद के इस फैसले में हामी भरनी पड़ी। सुमेद ने अंजू से, उसके इस फैसले में मदद मांगी। अंजू ने हर संभव मदद करने की बात कही। सुमेद ने अंजू और पलक को कुछ दिनों तक बिलकुल नार्मल रहने को कहा। ताकी, आगे क्या करना है, वो सोच सके।
पलक से शादी कर, सुमेद ने सब से दूर जा कर अपनी नई ज़िन्दगी की शुरुवात करने का तैय किया। जिसके लिए बिना किसी को बताई अपनी पुरानी जॉब छोड़, मुंबई में अपने एक्सपीरियंस के बलबूते एक बड़ी कंपनी में दूसरी जॉब पकड़ ली। वही एक फ्लैट किराये से भी ले लिया। जहा पलक और सुमेद शादी के बाद साथ रहे सके। सुमेद ने पूरा प्लान इस तरह बनाया की कभी किसी को अंजू का, इस मामले में साथ होने की बिलकुल भी भनक न लगे। ताकि भविष्य में अंजू को कभी भी किसी तरह की मुस्किल का सामना न उठाना पड़े। सुमेद ने अंजू और पलक को अपने प्लान के बारे में बताया। जिस में अंजू, ऑफिस के काम का बहाना कर, कुछ दिन पहेले ही, पलक के साथ मुंबई जा, घर के ज़रूरी सामानों का इंतज़ाम कर, पलक को वही घर पे छोड़ वापस अपने घर लौट आई। अंजू ने सुमेद के प्लान के मुताबित ही सब किया और पलक को उसके नए सफ़र के लिए, बहुत सारा होसला और ढेर सारी शुभकामनाये दे वापस अपने घर लौट आई। पलक और अंजू के मुंबई में रहने के दौरान सुमेद अपने घर पे ही रहा।
एक दिन सुबह, सुमेद ने अपने माता पिता और परिवार को अपना फैसल सुनाया और अपने इस फैसले में उनका आशीर्वाद और साथ चाहा। लेकिन आज भी सब उन दोनों के रिश्ते के खिलाफ थे। उन्होंने, सुमेद के इस फैसले को मनाने से साफ़ इनकार कर दिया और एक बार इस घर से जाने के बाद कभी भी लौट कर वापस ना आने को कह दिया । सुमेद भी आपन फैसला ले चूका था। परिवार को अलविदा कहे वो, अपनी ज़िन्दगी की नई शुरुवात के लिए निकल पड़ा। इस उम्मीद में की एक न एक दिन उसके परिवार वाले उसके रिस्तो को एक्सेप्ट कर लेगे। घर से निकल कर, सुमेद ने सीधा मुंबई जा पंहुचा। जहा पलक उसका इंतज़ार कर रही थी। जिस दिन सुमेद मुंबई पंहुचा, उस ही दिन पलक और सुमेद ने शादी कर, अपनी ज़िन्दगी की नई शुरुवात कर ली। सुमेद ने अंजू को शादी के बारे में बताया दिया और अपने और पलक का नंबर बदलने की बात बता दी। पलक और सुमेद ने अंजू को, हर कदम उनका साथ देने के लिए हमेश एहसानमंद रहने की बात कही और अपना ख्याल रखने को कहा।
उस दिन के बाद अंजू की पलक और सुमेद से कभी बात नहीं हुई। क्यों की दोनों का नंबर बदल गया था और सुमेद ने उसे मिलने से और बात करने से मन कर दिया था। ताकि परिवार वालो को पता चलने पे, अंजू किसी मुसीबत में न पढ़ जाये। सुमेद की हरकत से पूरा परिवार सदमे में था और साथ तो साथ काफी घुस्से और नाराज़गी में भी थी। सुमेद और अंजू के परिवार ने तैय किया की कोई भी सुमेद से ताल्लुकात नहीं रखेगा, जिस वजह से परिवार के डर से अंजू की भी कभी सुमेद और पलक से मिलने की हिम्मत नहीं हुई।
तीन साल बित गए, इस बिच सुमेद ने अपने करियर में काफी तरक्की कर लि। उधर अंजू की भी शादी हो गई। अंजू की शादी की खबर सुमीद को उसके एक दोस्त के ज़रिये पता चली, जो अंजू और उसके पति को जनता था। सुमेद ने ये बात पलक को बताई और दोनों ने अंजू से कांटेक्ट करने का फैसला किया। सुमेद के पास आज भी अंजू का नंबर मौजूद था। दोनों ने एक शाम घर से अंजू को फ़ोन लगाया, कॉल लग गया, दूसरी तरफ से अंजू ने फ़ोन उठाया। सुमेद ने कॉल को स्पीकर पर कर दिया। अंजू ने हेल्लो किया तो दूसरी तरफ से सुमेद ने भी हेल्लो कहा। दोनों एक दुसरे की आवाज़ पहचान गए। तीनो की आंखे भर आई, सुमेद ने अंजू को अपने बारे में सब बताया और उसके और उसके परिवार के बारे में सब पूछ भी लिया। अंजू ने सुमेद की बात अपने पति से करवाई, उसने अपनी पति को सुमेद और पलक के बारे में पहेले ही सब बता दिया था । अंजू ने मुंबई आ, अपने दोनों सबसे अच्छे दोस्तों से इतने सालो बाद दुबारा मिलने का तैय किया। सुमेद और पलक ने भी उसका वेलकम किया।
अचानक बेल बजी और पलक अपने ख्यालो से वापस बहार निकल आई। शाम हो चुकी थी। दरवाज़े पे सुमेद ही था। पलक और सुमेद दोनों तैयार हो अपनी दोस्त को सालो बाद मिलने स्टेशन के लिए निकल पड़े। गाड़ी समय पर थी। सुमेद और पलक भी समय पर स्टेशन पहुच गए। ट्रेन से उतरते ही अंजू पलक को देख कर सरप्राइज हो गई। पलक प्रेग्नेंट थी। आज तीन सालो बाद तीनो दोस्त दोबारा मिले थे। इतने दिनों बाद दोबारा मिलने की खुश से तीनो की आँखों से आंसू बहते ही जा रहे थे।
