Anshika Gupta

Children Stories


3.5  

Anshika Gupta

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कुछ विचार जो खुशी प्रदान करते

कुछ विचार जो खुशी प्रदान करते

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आज ही के समय की बात है, एक बच्चा आरव जो की इस लॉकडाऊन के चलते अपने स्कूल टीचर्स के दिए गए असाइनमेंट्स से परेशान था, वह एक दिन सुबह सुबह शांति से बैठकर सोच रहा था की कितना अच्छा होता अगर मैं उस पहले वाले ज़माने में होता जहाँ पर मोबाइल फ़ोन जैसा कुछ नहीं होता था इसलिए चिट्ठियाँ कबूतर के द्वारा भेजी जाती थी, यदि ऐसा हो जाता तो मेरे टीचर्स भी चिट्ठी के रूप में ही मुझे असाइनमेंट्स कबूतर के द्वारा भेजते और उन असाइनमेंट्स को मेरे तक पहुंचने में काफी समय लग जाताउसी तरह मैं भी उन्हें असाइनमेंट्स के आंसर्स चिट्ठी में ही कबूतर के द्वारा भेजता, और अगर कभी असाइनमेंट भारी होता या करने का मन नहीं होता , तो नहीं भेजता और जब उनकी चिट्ठी आती की तुम्हारा असाइनमेंट अभी तक नहीं पहुंचा है तो बोल देता की मैंने तो कबूतर के द्वारा भेजा था पर पता नहीं ये कबूतर आप तक क्यों नहीं पहुंचा

कितना अच्छा होता ये सब मजा आ जाताआरव ये सब सोच ही रहा था की तभी उसके घर में से किसी ने टेलीविज़न ऑन कर दिया, टेलीविज़न पर एक शो आ रहा था जिसमें दिखा रहे थे की पहले ज़माने में लोग किस तरह रहा करते थे, किस तरह अपनी चिट्ठियाँ कबूतर के द्वारा भेजा करते थे और किस तरह उन्हें मोबाइल, टेलेविसिव, फ़्रीडग, एयर कंडीशनर तथा अन्य सुविधाएँ न होने पर किन किन परेशानियों का सामना करना पड़ता थायह सब देखकर और सुनकर आरव ने अपने मन में फिर से सोचा की अच्छा है मैं इसी ज़माने में हूँ वरना तो मैं बिना मोबाइल, टेलीविज़न के बोर हो जाता न गेम्स खेल पता और न ही टेलीविज़न पर शोज़ देख पतायह सब सोचकर आरव मन ही मन में मुस्कुराया और ख़ुशी ख़ुशी जो असाइनमेंट्स बाकी थे उनको पूरा करने में जुट गया ।। 


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