छोटू बगीचे में
छोटू बगीचे में
अपने सुन्दर से बगीचे में छोटू अपनी बड़ी बहिन के साथ घूम रहा था। हवा तेज चल रही थी। छोटे छोटे पौधे हवा से हिल रहे थे। हिलते हुए पौधे सुन्दर लग रहे थे और छोटू ध्यान से देख रहा था। तरह तरह के पौधे थे । छोटू की बहिन ने माली से कहा-
“ ये छोटे पौधे हवा से हिल रहे हैं, हवा से गिर जायँगे, इन्हें रस्सी से बॉंध दो ना। “
माली ने बताया-“ बिटिया ! इन्हें बॉंधना अच्छा नहीं है। बॉंधने से इनकी जड़ें कमजोर हो जायँगी फिर ये मज़बूती से बड़े नहीं होंगे। मज़बूत नहीं होने के कारण बड़े होकर हवा के झोंकों से जल्दी गिर जायँगे।”
माली ने सही बात बताई। जब तेज हवा चलती है पौधे नीचे झुक जाते हैं, बाद में पुनः सीधे हो जाते हैं। गिरते नहीं हैं। उनमें हिलने डुलने की सामर्थ्य आती है। कठिनाइयों को झेलने से ही मज़बूती आती है। कठिनाइयों से घबराना नहीं चाहिये। हिम्मत नहीं हारनी चाहिये। कुछ कष्ट सहकर ही जीवन में मज़बूती आती है। जैसे एक छोटे बच्चे को ज़्यादा कपड़ों से लाद देने से वह बंध जाता है कि शरीर को कोई ऑंच ही नहीं आने पाती, और धीरे धीरे उसकी सहनशक्ति चुक जाती है और फिर वह कष्टों को सह नहीं पाता, परेशान हो जाता है ।
ऐसे ही पढ़ाई करने के लिये भी आराम छोड़ना पड़ता है। ज़्यादा सोना, आलस्य प्रमाद करना छोड़ना पड़ता है। जागरूक रहकर अध्ययन करने से ही सफलता मिलती है। सहन शक्ति बढ़ाकर कष्टों से नहीं घबराना चाहिये। वे हमें मज़बूत बनाने के लिये ही आते हैं।
छोटू को आज का बगीचे में घूमना अच्छा लगा। पौधों के बारे में उसकी जानकारी बढ़ी। और यह समझ में आया कि अपना काम स्वयं करना अच्छा है।आगे से उसने भी निश्चय किया कि अपना काम स्वयं करेगा।
