बार्बी-डोल
बार्बी-डोल
"जा तेरी कीट्टा" ये शब्द बारी बारी आरव के दिमाग में आ रहे थे। और क्यों न आए जो उसको अपनी प्यारी दीदी ने जो कहे थे। हाँ आरव की दीदी आज आरव से रूठ गई थी क्योंकि दीदी के साथ आरव ने ऐसी मस्ती जो की थी, उसने दीदी आयुशी की बार्बी डोल तोड़ डाली थी।
आरव ने अपनी मम्मी से पूछा "अब दीदी को कैसे मनाऊ ?"मम्मी ने जवाब देते हुए कहा "दीदी को तुने ही परेशान किया है तो तुम ही उसे मनाओ। और शाम को तो दीदी के झूले पर मस्त सुनहरे बाल वाली परी के जैसी बार्बी डोल झूल रही थी। दीदी बार्बी डोल देख रही थी और आरव दीदी को देख रहा था, आरव ने अपने लिए उड़ता हुआ हेलिकप्टर खरीदने पैसे इकट्ठे किये थे और उसके रूम में उसकी पीगी बेन्क टूटा हुआ पड़ा था ।
