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ज़िन्दगी का...

ज़िन्दगी का खेल है आसान जितना है खुद यहाँ बिना लिए किसी का एहसान गर्व महसूस हो पापा को जिस दिन समझ जाना सफल हो गयी ज़िन्दगी उस दिन

By Komal sawalakhe
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