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वक्त जलते...

वक्त जलते चूल्हे पर रखा था... फिर भी राख कुछ लम्हों की बिखरी थी... सब भूल गए चूल्हे को बुझाना वो राख अभी भी कुछ गरम कुछ ठंडी तो कुछ सुलगी थी..

By Richa Richa
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