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तुम समय की...

तुम समय की रेत पर छोड़ते चलो निशान ,देखती तुम्हे जमीं देखता ह आश्मान लिखे चलो नौजवान नित नई कहानिया,तुम मिटा दो ठोकरों से जुल्म की निशानिया कल की तुम मिशाल हो सब से बे मिशाल हो ,तिनके तिनके को बना दो जिंदगी का कारवा

By Rafat khan
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