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“ जिनकी...

“ जिनकी फितरत में हैरत समायी नहीं,जिनको हवश से जयादा मै भायी नहीं ऐसे साजन की मुझको जरूरत नहीं ,न कहने का सुन लो मुहूर्त यही | मै अकेली चलूंगी किस्मत से मिलूंगी,अरे मुझे क्या बेचेगा रुपया |”

By Rafat khan
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